मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कतर ने ईरान द्वारा किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है। कतर सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उसकी संप्रभुता और सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही कतर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत उसे अपनी रक्षा करने और आवश्यक होने पर जवाबी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार प्राप्त है।
कतर के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि देश की सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार ने ईरान के हमले को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया। कतर ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील भी की, लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि उसकी सुरक्षा पर दोबारा खतरा उत्पन्न हुआ तो वह उचित और वैध कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
कतर ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक संप्रभु राष्ट्र को आत्मरक्षा का अधिकार प्राप्त है। इसी आधार पर कतर ने संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर वह अपने हितों की रक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई कर सकता है।
इस घटनाक्रम के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कई देशों ने स्थिति पर चिंता जताते हुए तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि इस विवाद के और बढ़ने से पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर पूरे क्षेत्र की राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें कतर और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों से बातचीत के माध्यम से विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील कर रहा है।







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