देवरिया
22 नवंबर 2024। राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत पथरदेवा ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सम्बंधित सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ), एएनएम, संगिनी, आशा, आंगनबाड़ी को पीएचसी परिसर में स्थित ब्लॉक सभागार में शुक्रवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण में फाइलेरिया रोग और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने, फाइलेरिया मरीजों को रोग प्रबंधन, जांच के नाइट ब्लड सर्वे की जानकारी दी गई। स्वास्थ्य विभाग और स्वयंसेवी संस्था सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफॉर) के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में फाइलेरिया प्रभावित अंगों की देखभाल के लिए रोग प्रबंधन का डेमो भी दिया गया। कार्यक्रम में फाइलेरिया मरीजों को एमएमडीपी किट भी वितरित की गई।
वेक्टर बर्न डिजीज कंट्रोल कार्यक्रम के नोडल एसीएमओ डॉ. हरेंद्र कुमार ने रोगी हितधारक मंच (पीएसपी) की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि इस मंच के माध्यम से प्रधान, कोटेदार, आशा कार्यकर्ता और प्रभावित रोगी समुदाय को जागरूक किया जा सकता है। इसके द्वारा रोगी अपनी पीड़ा साझा कर सकते हैं और समुदाय को फाइलेरिया की गंभीरता का अहसास करवा सकते हैं। इस जागरूकता अभियान से 2027 तक फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
डब्ल्यूएचओ के ज़ोनल कोआर्डिनेटर डॉ. नित्यानंद ठाकुर ने फाइलेरिया रोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मच्छरों के काटने से होने वाला एक लाइलाज रोग है, जो समय पर सावधानी नहीं बरतने पर व्यक्ति को दिव्यांग बना सकता है। इससे बचने का एकमात्र उपाय मच्छरों से बचाव और नियमित रूप से फाइलेरिया विरोधी दवा का सेवन करना है। उन्होंने कहा कि एमडीए अभियान के तहत पांच साल तक लगातार साल में एक बार दवा का सेवन करने से इस बीमारी का जोखिम कम किया जा सकता है।
जिला मलेरिया अधिकारी सीपी मिश्रा ने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर और वीएचएसएनडी सत्रों के माध्यम से सामुदायिक बैठकों में लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सीएचओ, हर माह की 15 तारीख को मनाए जाने वाले एकीकृत निक्षय दिवस पर फाइलेरिया और कालाजार रोगियों की जानकारी ई-कवच पोर्टल पर अनिवार्य रूप से फीड करें। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया मच्छर जनित रोग है, जो मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। इसके संक्रमण से लिम्फोडिमा और हाइड्रोसील रोग होता है। यह न केवल व्यक्ति को दिव्यांग बना देता है बल्कि मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव डालता है। शुरुआत में डॉक्टर की सलाह पर दवा का सेवन करने से बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान सहायक मलेरिया अधिकारी सुधाकर मणि ने फाइलेरिया रोग प्रबंधन के लिए डेमो दिया और फाइलेरिया के कारण शरीर में सूजन और अंगों पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि नियमित व्यायाम और प्रभावित अंगों की उचित साफ-सफाई से इस बीमारी के संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने एमएमडीपी प्रदर्शन करके यह भी दिखाया कि फाइलेरिया प्रभावित अंगों की देखभाल और सफाई कैसे करनी चाहिए। आयुष्मान आरोग्य मंदिर की सीएचओ अनुराधा ने अपने सेंटर पर पीएसपी के गठन की जानकारी दी और उसके माध्यम से की गई गतिविधियों को साझा किया।
इस कार्यक्रम में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. प्रभात रंजन, बायोलॉजिस्ट आरके मिश्रा, बीसीपीएम आशुतोष त्रिपाठी, सीफॉर संस्था के प्रतिनिधि सहित बीएसडब्ल्यू राकेश, सीएचओ अनुराधा सिंह, श्वेता गुप्ता, शबनम, सोनी यादव, राजपाल और एएनएम, संगिनी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।







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