बिहार का भोजपुर जिला शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी का लाल भरत तिवारी अब क्रांति की अलख जगा लोगों के दिलों में वह जगह बना लिया जिसने भोजपुर जिले को अमर कर दिया है...
क्रांति का मतवाला यह बांका जवान अपना जीवन उन लोगों के लिए कुर्बान कर दिया जिसकी शासन प्रशासन की नजर में वह अहमियत नहीं थी जो उन्हें मिलनी चाहिए।
बस इसी की लड़ाई लड़ते लड़ते जब भरत तिवारी शहीद हुए तो आंसुओं का वह सैलाब उमड़ा जिसमें पूरा देश भीग कर नहा लिया हो...
भरत तिवारी जैसे पवित्र और निर्मल आत्माएं धरती पर यदा कदा आती हैं फिर वह ऐसा इतिहास बना जाती हैं कि उसके आगे सब कुछ फीका दिखाई देता है।
क्या जज्बा था भरत के भीतर क्या सम्मान था उसके दिल में लोगों के लिए
उसकी बानगी तब दिखी जब उसे पुलिस की तीन गोली लगने के बाद भी वह हाथ हिलाते हुए लोगों से आखिरी बार विदा ले रहा था।
मानो भरत उनसे यह कहने का प्रयास कर रहा था कि इस जन्म में न सही फिर अगले जनम में आपका ऋण उतारने जरूर आऊंगा।
भरत तिवारी बीमार राजनीति का शिकार वह बागी निकला जिसके रक्त से क्रांतिकारी ज्वालामुखी का लावा दहक उठा है।
आज हर आम खास उस दिव्य माता पिता जिसने भरत को जन्म दिया वह धरती जहां भरत शहीद हुआ उसके दर्शनों के लिए बेचैन हैं।
परिवार को मदद देने वालों की बड़ी लंबी कतार लगी हुई है, हर कोई इसी बहाने उस दिव्यात्मा को अपनी श्रद्धांजलि देना चाह रहा हो...
दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त,
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी।"







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