काठमांडू, 29 अगस्त:। नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण बाढ़ ने हिमालयी देश को दहला दिया है। शनिवार सुबह तक मरने वालों की संख्या 626 पहुंच गई है, जबकि करीब 2,500 लोग अब भी लापता हैं। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के मुताबिक यह नेपाल के इतिहास की सबसे बड़ी बाढ़ त्रासदियों में से एक बनती जा रही है।
*कैसे हुई तबाही*
इस तबाही की शुरुआत ऊंचे पहाड़ी इलाकों से हुई। शुरुआती जांच के मुताबिक, 26 अगस्त को सुबह 8:37 बजे नेपाल-चीन सीमा के पास 5.2 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके बाद एक ग्लेशियर टूटा और बर्फ, चट्टान व मलबे का भारी हिस्सा लेंडे नदी में जा गिरा। इससे नदी का पानी कुछ समय के लिए रुक गया और प्राकृतिक बांध बन गया। जब यह बांध टूटा तो पानी के साथ मिट्टी, पत्थर और मलबे का तेज रेला भोटेकोशी और त्रिशूली नदी की ओर बढ़ गया।
बुधवार सुबह करीब 9 बजे तिब्बत की ओर से आई इस सैलाब की लहर ने रसुवा जिले के तिमुरे बाजार और स्याफ्रुबेसी को पूरी तरह तबाह कर दिया। लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
*जिलेवार हालात*
NDRRMA के शुक्रवार शाम के आंकड़ों के अनुसार:
- चितवन में सबसे ज्यादा 233 शव मिले
- नवलपरासी पूर्व में 154, गोरखा में 46, धादिंग में 40
- नुवाकोट में 37, तनहूं में 30, नवलपरासी पश्चिम में 27 और रसुवा में 12 शव बरामद
लापता 2,400 से ज्यादा लोगों में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के कर्मी, विदेशी पर्यटक, सुरक्षाकर्मी और आम नागरिक शामिल हैं। अकेले 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के 933 कर्मचारी लापता बताए गए, जिनमें से 254 को बचा लिया गया है। अपर त्रिशूली-1 परियोजना के ही 576 कर्मचारियों का अभी तक पता नहीं चला है, जिनके सुरंगों में फंसे होने की आशंका है।
*भारतीयों का हाल*
इस आपदा में बड़ी संख्या में भारतीय भी फंसे हैं। करीब 320 भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के 100 लोगों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। राहत की बात है कि तिब्बत में मौजूद करीब 400 भारतीयों से संपर्क हो चुका है और वे सुरक्षित हैं। लापता विदेशियों में 644 विदेशी नागरिक शामिल हैं। अब तक 129 विदेशी नागरिकों को बचाया जा चुका है।
*बचाव अभियान युद्धस्तर पर*
रेस्क्यू के लिए 15,431 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं, जिनमें नेपाल आर्मी के 6,755, नेपाल पुलिस के 4,473 और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 4,203 जवान शामिल हैं। 12 से 15 हेलीकॉप्टरों से हवाई सर्वे और रेस्क्यू चल रहा है। अब तक 4,451 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें शुक्रवार को हाइड्रोइलेक्ट्रिक टनल से बचाए गए 191 लोग भी शामिल हैं। नेपाल रेड क्रॉस के मुताबिक 90,000 से ज्यादा लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं।
भारत ने मदद बढ़ा दी है। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर के अनुसार 37.5 टन मानवीय सहायता, दवाएं और खाने के पैकेट लेकर दूसरी फ्लाइट नेपाल रवाना हो चुकी है। इससे पहले 10 टन राहत सामग्री भेजी गई थी। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
*फिर बाढ़ का खतरा*
NDRRMA ने चेतावनी दी है कि भोटेकोशी नदी के पास फिर पानी बढ़ने लगा है, जिससे एक और बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। हालांकि शनिवार सुबह 6:30 बजे तक भोटेकोशी और त्रिशूली में बहाव सामान्य बताया गया। पहाड़ी इलाकों में कई सड़कें और 35 पक्के पुल व 45 सस्पेंशन ब्रिज बह जाने से बचाव दलों को पहुंचने में भारी दिक्कत हो रही है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह सड़क मार्ग से नुवाकोट के बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर रहे हैं। उधर उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती जिलों में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है !!






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