देवरिया, 25 अगस्त 2026। निरीक्षण भवन, देवरिया में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग, लखनऊ की सदस्य ऋतु शाही की अध्यक्षता में महिला जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया गया।
जनसुनवाई के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आई महिलाओं एवं आवेदिकाओं ने अपनी समस्याओं एवं शिकायतों से संबंधित कुल 13 प्रकरण प्रस्तुत किए। सदस्य द्वारा प्रत्येक प्रकरण को गंभीरतापूर्वक सुनते हुए संबंधित अधिकारियों से वस्तुस्थिति की जानकारी ली गई तथा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
प्राप्त प्रकरणों में से 10 प्रकरणों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। शेष प्रकरणों में आवश्यक जांच एवं कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को निर्देशित किया गया। इनमें तीन प्रकरण जमीनी विवाद से संबंधित पाए गए, जिन्हें संबंधित अधिकारियों को स्थलीय जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रकरणों की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें तथा इसकी सूचना संबंधित पक्षकारों को भी उपलब्ध कराएं।
सदस्य ऋतु शाही ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि महिलाओं से संबंधित शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए तथा इनके निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को शासन द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ दिलाने के साथ उनकी सुरक्षा एवं सम्मान सुनिश्चित करना सभी संबंधित विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
जनसुनवाई के दौरान महिला सुरक्षा, उत्पीड़न, पारिवारिक विवाद, घरेलू हिंसा, भरण-पोषण सहित अन्य समस्याओं से संबंधित मामलों में की जा रही कार्रवाई की भी जानकारी ली गई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि पीड़ित महिलाओं को आवश्यक मार्गदर्शन एवं सहयोग उपलब्ध कराने के साथ उन्हें संबंधित विभागीय योजनाओं एवं विधिक सहायता के बारे में भी जानकारी दी जाए।
कार्यक्रम में उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी, अपर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। महिला कल्याण विभाग के कार्मिकों ने भी कार्यक्रम में उपस्थित रहकर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में आवश्यक सहयोग एवं समन्वय प्रदान किया।
अंत में सदस्य ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनसुनवाई में प्राप्त जिन प्रकरणों का मौके पर निस्तारण संभव नहीं है, उनमें नियमानुसार जांच कर समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि पीड़ित महिलाओं को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें शासन की मंशा के अनुरूप त्वरित राहत मिल सके।









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