देवरिया। देवरिया जिले के रुद्रपुर तहसील व थाना क्षेत्र के अंतर्गत पिडहनी गांव में बुधवार को रास्ते के विवाद की पैमाइश के दौरान एक किसान सर्वजीत का गिरने से मौत हो जाने से माहौल तनावपूर्ण हो गया। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए किसान का शव सड़क पर रखकर करीब चार घंटे तक प्रदर्शन किया। परिजनों का आरोप है कि पैमाइश के दौरान मौजूद एसडीएम ने किसान को डांटा-फटकारा, जिससे वह मानसिक रूप से आहत हो गया और उसकी तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार, गांव में लंबे समय से रास्ते को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद चल रहा था। इसी विवाद के समाधान के लिए बुधवार को राजस्व विभाग की टीम एसडीएम के नेतृत्व में मौके पर पैमाइश करने पहुंची थी। पैमाइश के दौरान दोनों पक्षों में कहासुनी भी हुई। इसी बीच किसान की तबीयत अचानक बिगड़ गई। ग्रामीणों ने उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
किसान की मौत की खबर मिलते ही गांव में आक्रोश फैल गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि एसडीएम ने किसान के साथ अभद्र व्यवहार किया और सार्वजनिक रूप से डांटा, जिससे वह गहरे सदमे में आ गया। उनका कहना है कि यदि अधिकारी संवेदनशीलता से काम लेते तो यह घटना नहीं होती।
घटना के विरोध में परिजन और ग्रामीण शव को सड़क पर रखकर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई। करीब चार घंटे तक चले प्रदर्शन के कारण क्षेत्र में आवागमन भी प्रभावित रहा।
सूचना मिलने पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया। काफी देर तक चली वार्ता के बाद परिजन शांत हुए और पोस्टमार्टम के लिए शव भेजने पर सहमत हुए।
प्रशासन का कहना है कि किसान की मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। साथ ही, पैमाइश के दौरान हुई पूरी घटना की जांच कराई जाएगी। यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या अनुचित व्यवहार सामने आता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। इस घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासन की कार्यशैली को लेकर नाराजगी बनी हुई है। वहीं, सभी की निगाहें अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं, जिनसे किसान की मौत के कारणों और लगाए गए आरोपों की सच्चाई सामने आ सकेगी।








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