तमकुहीराज। तहसील प्रशासन ने फर्जी अधिवक्ताओं पर शिकंजा कसने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब तमकुहीराज तहसील के किसी भी न्यायालय में बिना सीओपी (Certificate of Practice) नंबर वाले अधिवक्ता की ओर से प्रस्तुत की गई फाइल स्वीकार नहीं की जाएगी। इस निर्णय के बाद तहसील परिसर में सक्रिय फर्जी अधिवक्ताओं और दलालों में हड़कंप मच गया है।
एसडीएम आकांक्षा मिश्रा के निर्देश पर तहसील के सभी न्यायालयों में वैध सीओपीधारी अधिवक्ताओं की सूची उपलब्ध करा दी गई है। न्यायालयों में आने वाले अधिवक्ताओं के नाम और उनके सीओपी नंबर का मिलान किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति अधिवक्ता बनकर कार्य करता पाया गया और उसके पास वैध सीओपी नहीं हुई, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस अभियान के तहत बार संघ ने भी प्रशासन का सहयोग करते हुए सभी अधिकृत अधिवक्ताओं की सीओपी नंबर सहित सूची तहसील प्रशासन को सौंप दी है। इससे वास्तविक अधिवक्ताओं की पहचान आसान होगी और फर्जी तरीके से वकालत करने वालों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
बार संघ के मंत्री अमरनाथ सिंह ने कहा कि लंबे समय से कुछ लोग अधिवक्ता का वेश धारण कर भोले-भाले वादकारियों को गुमराह कर रहे थे। ऐसे लोगों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कदम न्याय व्यवस्था की गरिमा बनाए रखने और आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है।
बार संघ के अध्यक्ष अशोक राय ने स्पष्ट घोषणा की कि अब बिना वैध सीओपी नंबर के किसी भी अधिवक्ता का मुकदमा दाखिल नहीं होगा और न ही जमानत अथवा अन्य न्यायिक कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने सभी अधिवक्ताओं से नियमों का पालन करने और न्यायिक व्यवस्था को पारदर्शी बनाने में सहयोग की अपील की।
तहसील प्रशासन की इस सख्ती का अधिवक्ता समुदाय ने स्वागत किया है। वहीं, फर्जी अधिवक्ताओं और दलालों में कार्रवाई की आशंका को लेकर बेचैनी बढ़ गई है। माना जा रहा है कि इस पहल से न्यायालयों की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी होगी और वादकारियों को ठगी व धोखाधड़ी से भी राहत मिलेगी।







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