नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भारत–म्यांमार सीमा की सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पुष्टि की है कि भारत–म्यांमार की लगभग 1,610 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर व्यापक स्तर पर फेंसिंग (बाड़बंदी) का कार्य कराया जा रहा है। इस परियोजना पर करीब 31,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
गृह मंत्री के अनुसार, इस फेंसिंग का मुख्य उद्देश्य अवैध घुसपैठ, हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाना, सीमा पार होने वाली आपराधिक गतिविधियों को नियंत्रित करना तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाना है।
भारत–म्यांमार सीमा चार राज्यों अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से होकर गुजरती है। लंबे समय से यह सीमा अपेक्षाकृत खुली रही है, जिसके कारण सीमा पार आवागमन के साथ-साथ अवैध गतिविधियों की भी शिकायतें सामने आती रही हैं। हाल के वर्षों में मणिपुर सहित पूर्वोत्तर के कई इलाकों में सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने सीमा प्रबंधन को प्राथमिकता दी है।
सरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीक से लैस फेंसिंग, निगरानी उपकरणों और सीमा अवसंरचना के विकास से सुरक्षा एजेंसियों को सीमा पर प्रभावी निगरानी रखने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही सीमा चौकियों और गश्त व्यवस्था को भी और मजबूत किया जाएगा।
हालांकि, इस फैसले को लेकर पूर्वोत्तर के कुछ सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदायों ने अपनी चिंताएं भी व्यक्त की हैं। उनका कहना है कि सीमा के दोनों ओर रहने वाले कई समुदायों के बीच वर्षों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध हैं, जिन पर इस व्यवस्था का प्रभाव पड़ सकता है। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि सुरक्षा आवश्यकताओं और स्थानीय हितों के बीच संतुलन बनाते हुए परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
सरकार का मानना है कि सीमा पर फेंसिंग पूरी होने के बाद अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा और भारत–म्यांमार सीमा की सुरक्षा पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हो सकेगी।







0 comments:
एक टिप्पणी भेजें