गौतम बुद्ध के जमाने वाले धान काला नमक (Kala Namak Rice) के आधुनिक रूप में आने की कहानी काफी दिलचस्प है. इसकी सबसे आधुनिक किस्म काला नमक किरण है, जिसे करीब ढाई सौ किस्म के धान में से छांटा गया है. इसे नए रूप में लाने में करीब 23 साल लगे. यह सामान्य धान के मुकाबले 20 से 25 दिन की देरी से तैयार होता है, लेकिन दाम और स्वाद-सुगंध के मामले में यह बासमती (Basmati Rice) को भी मात देता है. सामान्य तौर पर 115 से 120 दिन में धान (Paddy) की फसल तैयार हो जाती है लेकिन कालानमक 140 दिन में तैयार होगा. पूर्वांचल के 11 जिलों को इस धान का जीआई (GI) टैग मिला हुआ है.अपना जनपद देवरिया भी इस सूचि मे शामिल है।
बासमती का एक्सपोर्ट करीब 70 रुपये किलो के रेट पर होता है जबकि काला नमक का दाम 300 रुपये किलो है. इस धान को विश्व स्तर पर पहचान जाने-माने कृषि वैज्ञानिक प्रो. रामचेत चौधरी ने दिलाई. जिन्होंने इसके विकास पर 1997 में काम शुरू किया था. वो फिलीपीन्स स्थित इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (IRRI) में जर्म प्लाज्म एक्सचेंज के ग्लोबल कोर्डिनेटर रह चुके हैं. यही नहीं यूनाइटेड नेशन के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) में चीफ टेक्निकल एडवाइजर के पद पर भी लंबे वक्त तक काम किया है । आज कोरोना काल मे डॉक्टर कोविड-19 मरीजों को सल्फर का टेबलेट दे रहे हैं लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं कि काला नमक धान में प्रचुर मात्रा में सल्फर ,आयरन, जिंक होता है।






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