देवरिया जनपद में शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या मामले में फरार चल रहे बेसिक शिक्षा विभाग देवरिया के लिपिक संजीव सिंह ने गोरखपुर की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। अदालत ने उसे 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।
मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) अभिषेक चतुर्वेदी की अदालत में हुई। संजीव सिंह जनपद की रामनाथ कॉलोनी का निवासी है और बेसिक शिक्षा विभाग में लिपिक के पद पर तैनात था। वह 22 फरवरी 2026 को दर्ज मुकदमे के बाद से फरार चल रहा था।यह मामला शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़ा है। घटना के बाद उनकी पत्नी गुड़िया सिंह ने गुलरिहा थाने में तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दोनों आरोपित शिक्षक को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे और उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दे रहे थे।
पुलिस विवेचना में सामने आया कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन के नाम पर कृष्ण मोहन सिंह समेत तीन शिक्षकों से कथित तौर पर 16-16 लाख रुपये की मांग की गई थी। आरोप है कि 20 फरवरी को शिक्षक को कार्यालय बुलाकर अपमानित किया गया था। इसके अगले दिन उन्होंने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।घटनास्थल से मृतक की जेब से चार पन्नों का सुसाइड नोट बरामद हुआ था। सुसाइड नोट में कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी मौत के लिए तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह को जिम्मेदार ठहराया था। पुलिस ने इसी सुसाइड नोट को जांच का आधार बनाते हुए मामले की विवेचना आगे बढ़ाई।
इस बहुचर्चित मामले में निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को गुलरिहा पुलिस 16 जून को नई दिल्ली से गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, एक अन्य आरोपित पूर्व प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को भी घटना के कुछ दिनों बाद गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। अब संजीव सिंह के आत्मसमर्पण के बाद मामले के सभी प्रमुख आरोपित न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में आ गए हैं।







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