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बुधवार, 11 मार्च 2026

फर्जी वरासत के माध्यम से सरकारी धन के दुरुपयोग का पुराना मामला उजागर, डीएम दिव्या मित्तल ने दिए एफआईआर के निर्देश

 

 *लेखपाल निलंबित, राजस्व निरीक्षक पर विभागीय कार्रवाई की संस्तुति



देवरिया, 11 मार्च।जनपद देवरिया में वर्ष फरवरी 2024 से जुड़े एक पुराने प्रकरण में फर्जी वरासत दर्ज कर सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला जांच में उजागर हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने, विभागीय कार्रवाई करने तथा अनियमित रूप से प्राप्त धनराशि की वसूली के निर्देश दिए हैं।

यह प्रकरण तहसील सलेमपुर क्षेत्र के ग्राम पडरीगजराज से संबंधित है।  अभिलेखों के अनुसार गाटा संख्या 34 व 25 की भूमि के मूल खातेदार फेकू पुत्र सुखन थे, जिनकी लगभग 30 वर्ष पूर्व मृत्यु हो चुकी है तथा उनके कोई विधिक वारिस नहीं बताए गए हैं।

जांच में सामने आया कि वर्ष फरवरी 2024 में  अनुचित लाभ प्राप्त करने की नीयत से ग्राम प्रधान इंदू देवी के पति रामप्रताप  द्वारा तत्कालीन लेखपाल अजय कुमार यादव एवं राजस्व निरीक्षक धर्मप्रकाश सिंह के माध्यम से मृतक फेकू की कथित पत्नी के रूप में माया देवी के नाम पर फर्जी तरीके से वरासत दर्ज करा दी गई।

इसके बाद उक्त भूमि में से 0.0245 हेक्टेयर भूमि को पंचायत भवन निर्माण के लिए मुख्य विकास अधिकारी, देवरिया के नाम 66,67,920 रुपये में बैनामा कर दिया गया। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-727बी (नवलपुर–सिकंदरपुर) परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के तहत भी माया देवी को मुआवजा राशि प्राप्त हुई। इस प्रकार कुल 74,03,398 रुपये की धनराशि माया देवी को प्राप्त हुई।

मामले की शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर उपजिलाधिकारी सलेमपुर द्वारा राजस्व टीम गठित कर 26 एवं 27 फरवरी 2026 को स्थल एवं अभिलेखीय जांच कराई गई। 9 मार्च 2026 को प्रस्तुत जांच आख्या में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।

जांच में पाया गया कि माया देवी के नाम दर्ज की गई वरासत बिना समुचित जांच के की गई थी, जबकि मामला विवादित था। इसके बावजूद तत्कालीन लेखपाल एवं राजस्व निरीक्षक द्वारा वरासत दर्ज की गई। साथ ही वरासत का आवेदन ग्राम प्रधान पति रामप्रताप द्वारा किया गया था, जिससे उनकी संलिप्तता भी प्रथम दृष्टया प्रतीत होती है।

जांच में यह भी सामने आया कि पंचायत भवन के लिए भूमि क्रय की धनराशि माया देवी के खाते में आने के बाद उसमें से 15 लाख रुपये ग्राम प्रधान पति रामप्रताप के खाते में तथा 8 लाख रुपये सफाईकर्मी रामराज प्रसाद के खाते में स्थानांतरित किए गए। वहीं 7 लाख रुपये सफाईकर्मी रामराज प्रसाद के खाते से ग्राम प्रधान के पुत्र राहुल प्रताप सिंह के खाते में भेजे गए तथा 1 लाख रुपये नकद दिए जाने की भी पुष्टि हुई। इन लेन-देन का कोई संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी द्वारा पारित आदेश दिनांक 10 मार्च 2026 के तहत संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराने के निर्देश डीपीआरओ को दिए गए हैं। साथ ही प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए तत्कालीन लेखपाल अजय कुमार यादव को निलंबित करने तथा राजस्व निरीक्षक धर्मप्रकाश सिंह के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है।

इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के अंतर्गत प्राप्त 7,35,478 रुपये की मुआवजा राशि की वसूली माया देवी से किए जाने के भी निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संबंधित भूमि को राज्य सरकार में निहित किए जाने की प्रक्रिया भी नियमानुसार प्रारंभ करने को कहा गया है।

जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि और धन से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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