: शिव- कल्याण स्वरूप
: महेश्वर- माया के अधीश्वर
: शम्भू- आनंद स्स्वरूप वाले
: पिनाकी- पिनाक धनुष धारण करने वाले
: चंद्रशेखर- सिर पर चंद्रमा धारण करने वाले
: वामदेव- अत्यंत सुंदर स्वरूप वाले
: विरूपाक्ष- भौंडी आंख वाले
: कपर्दी- जटाजूट धारण करने वाले
: नीललोहित- नीले और लाल रंग वाले
: शंकर- सबका कल्याण करने वाले
: शूलपाणी- हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले
: खटवांगी- खटिया का एक पाया रखने वाले
: विष्णुवल्लभ- भगवान विष्णु के अतिप्रेमी
: शिपिविष्ट- सितुहा में प्रवेश करने वाले
: अंबिकानाथ- भगवति के पति
: श्रीकण्ठ – सुंदर कण्ठ वाले
: भक्तवत्सल- भक्तों को अत्यंत स्नेह करने वाले
: भव- संसार के रूप में प्रकट होने वाले
: शर्व – कष्टों को नष्ट करने वाले
: त्रिलोकेश- तीनों लोकों के स्वामी
: शितिकण्ठ – सफेद कण्ठ वाले
: शिवाप्रिय- पार्वती के प्रिय
: उग्र- अत्यंत उग्र रूप वाले
: कपाली- कपाल धारण करने वाले
: कामारी – कामदेव के शत्रु
: अंधकारसुरसूदन – अंधक दैत्य को मारने वाले
: गंगाधर – गंगा जी को धारण करने वाले
: ललाटाक्ष – ललाट में आँख वाले
: कालकाल- काल के भी काल
: कृपानिधि – करूणा की खान
: भीम – भयंकर रूप वाले
: परशुहस्त – हाथ में फरसा धारण करने वाले
: मृगपाणी – हाथ में हिरण धारण करने वाले
: जटाधर – जटा रखने वाले
: कैलाशवासी – कैलाश के निवासी
: कवची- कवच धारण करने वाले
: कठोर- अत्यन्त मजबूत देह वाले
: त्रिपुरांतक – त्रिपुरासुर को मारने वाले
: वृषांक – बैल के चिह्न वाली झंडा वाले
: वृषभारूढ़- बैल की सवारी वाले
: भस्मोद्धूलितविग्रह – सारे शरीर में भस्म लगाने वाले
: सामप्रिय – सामगान से प्रेम करने वाले
: स्वरमयी – सातों स्वरों में निवास करने वाले
: त्रयीमूर्ति – वेदरूपी विग्रह करने वाले
: अनीश्वर – जिसका और कोई मालिक नहीं है
: सर्वज्ञ – सब कुछ जानने वाले
: परमात्मा – सबका अपना आपा
: सोमसूर्याग्निलोचन – चंद्र, सूर्य और अग्निरूपी आँख वाले
: हवि – आहूति रूपी द्रव्य वाले
: यज्ञमय – यज्ञस्वरूप वाले
: सोम – उमा के सहित रूप वाले
: पंचवक्त्र – पांच मुख वाले
: सदाशिव – नित्य कल्याण रूप वाले
: विश्वेश्वर – सारे विश्व के ईश्वर
: वीरभद्र – बहादुर होते हुए भी शांत रूप वाले
: गणनाथ – गणों के स्वामी
: प्रजापति – प्रजाओं का पालन करने वाले
: हिरण्यरेता – स्वर्ण तेज वाले
: दुर्धुर्ष – किसी से नहीं दबने वाले
: गिरीश – पहाड़ों के मालिक
: गिरिश – कैलाश पर्वत पर सोने वाले
: अनघ – पापरहित
: भुजंगभूषण – सांप के आभूषण वाले
: भर्ग – पापों को भूंज देने वाले
: गिरिधन्वा – मेरू पर्वत को धनुष बनाने वाले
: गिरिप्रिय – पर्वत प्रेमी
: कृत्तिवासा – गजचर्म पहनने वाले
: पुराराति – पुरों का नाश करने वाले
: भगवान् – सर्वसमर्थ षड्ऐश्वर्य संपन्न
: प्रमथाधिप – प्रमथगणों के अधिपति
: मृत्युंजय – मृत्यु को जीतने वाले
: सूक्ष्मतनु – सूक्ष्म शरीर वाले
: जगद्व्यापी – जगत् में व्याप्त होकर रहने वाले
: जगद्गुरू – जगत् के गुरू
: व्योमकेश – आकाश रूपी बाल वाले
: महासेनजनक – कार्तिकेय के पिता
: चारुविक्रम – सुन्दर पराक्रम वाले
: रूद्र – भक्तों के दुख देखकर रोने वाले
: भूतपति – भूतप्रेत या पंचभूतों के स्वामी
: स्थाणु – स्पंदन रहित कूटस्थ रूप वाले
: अहिर्बुध्न्य – कुण्डलिनी को धारण करने वाले
: दिगम्बर – नग्न, आकाशरूपी वस्त्र वाले
: अष्टमूर्ति – आठ रूप वाले
: अनेकात्मा – अनेक रूप धारण करने वाले
: सात्त्विक – सत्व गुण वाले
: शुद्धविग्रह – शुद्धमूर्ति वाले
: शाश्वत – नित्य रहने वाले
: खण्डपरशु – टूटा हुआ फरसा धारण करने वाले
: अज – जन्म रहित
: पाशविमोचन – बंधन से छुड़ाने वाले
: मृड – सुखस्वरूप वाले
: पशुपति – पशुओं के मालिक
: देव – स्वयं प्रकाश रूप
: महादेव – देवों के भी देव
: अव्यय – खर्च होने पर भी न घटने वाले
: आशुतोष – तुरंत प्रसन्न होनेवाला
: पूषदन्तभित् – पूषा के दांत उखाडऩे वाले
: अव्यग्र – कभी भी व्यथित न होने वाले
: दक्षाध्वरहर – दक्ष के यज्ञ को नष्ट करने वाले
: हर – पापों व तापों को हरने वाले
: भगनेत्रभिद् – भग देवता की आंख फोडऩे वाले
: अव्यक्त – इंद्रियों के सामने प्रकट न होने वाले
: सहस्राक्ष – अनंत आँख वाले
: सहस्रपाद – अनंत पैर वाले
: अपवर्गप्रद – कैवल्य मोक्ष देने वाले
: अनंत – देशकालवस्तुरूपी परिछेद से रहित
: तारक – सबको तारने वाला
: परमेश्वर – सबसे परे ईश्वर







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