सांसद के चार वर्षों के कार्यकाल से जनपद की अधिकतर जनता संतुष्ट
लोकसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन पर फिर भारी पड़ सकता है सांसद मेनका गांधी का चेहरा
सुलतानपुर।
भारतीय जनता पार्टी पिछले दो वर्ष के कार्यकाल से केन्द्र और प्रदेश की सत्ता पर काबिज है। सत्ता विरोधी लहर से अब वह लड़खड़ाने लगी है। लेकिन आने वाले लोकसभा चुनाव में जनपद में भाजपा पर सांसद मेनका संजय गांधी का किरदार भारी है। जनपद में उनके चेहरे के आगे भारतीय जनता पार्टी में अभी कोई विकल्प नहीं तैयार हो पाया है । साथ ही सांसद मेनका गांधी का चेहरा विपक्षी इंडिया गठबंधन पर भारी दिखाई पड़ रहा है। वर्ष
2019 के लोकसभा चुनाव में पूर्व पूर्व केंद्रीय मंत्री सांसद संजय मेनका गांधी को भारतीय जनता पार्टी ने सुल्तानपुर लोकसभा संसदीय क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित किया था। चुनाव के शुरुआती दौरान में सांसद मेनका गांधी कुछ दिन का कार्यक्रम बनाकर जिले में आई। लेकिन जिले में भारतीय जनता पार्टी के प्रति असंतोष को देखते हुए उन्हें जनपद में रुककर जोरदार कार्यक्रम चलाना पड़ा।उन्होंने महागठबंधन प्रत्याशी को शिकस्त देने के लिए जोरदार तरीके से जनपद में कार्यक्रम शुरू किया। मेनका गांधी के कार्यशैली वह तूफानी दौरे ने उस समय भाजपा के पक्ष में माहौल खड़ा कर दिया। हालांकि गठबंधन के प्रत्याशी बाहुबली होने कारण उन्हें सत्ता से दूर रखने के लिए उनके खिलाफ जनपद के अन्य सियासी नेता और गठबंधन में शामिल पार्टियों के नेता मुखर हो गए थे।कुछ तो अन्दर खाने से उन्हें परास्त करने के लिए जुटे। इसका सीधा फायदा उन्हें शिकस्त देने की मजबूत रणनीति बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी पूर्व केंद्रीय मंत्री सांसद मेनका संजय गांधी को मिला। इसके बाद भी कड़े संघर्ष में उन्होंने गठबंधन के प्रत्याशी को शिकस्त दी। हालांकि चुनाव परिणाम आने के बाद सांसद मेनका गांधी जनपद के नेताओं और मठाधीश सत्ता के ठेकेदारों से काफी खफा थी। लेकिन उन्होंने उस दौरान की परिस्थितियों को स्वीकार करते हुए जिले में विकास कार्यों का खाका तैयार किया। जिन लोगों ने उनके साथ मजबूती से खड़े होकर कार्य किया।उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सांसद ने संभाली।नतीजा ये हुआ किस जिले में कानून व्यवस्था का राज स्थापित हुआ। बाहुबली लोगों को सुरक्षित ठिकाना तलाशना पड़ा। श्रीमती गांधी ने जिले में विकास का खाका तैयार करते हुए जनपद को मॉडल बनाने के लिए ताना-बाना बुनते हुए सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर विकास कार्य को अमलीजामा पहनाना शुरू किया। जनपद में कई बिजली उपकेंद्र,मेडिकल कॉलेज, ट्रामा सेंटर के अलावा सड़कों का जाल बिछाने का कार्य उन्होंने कराया।
*शहर को मॉडल बनाने का किया कार्य*
सांसद मेनका गांधी ने शहर की सड़क का चौड़ीकरण करा कर बीच में डिवाइडर का निर्माण कराते हुए उसमें पौधरोपण कराया। बिजली के खम्भों को बीच मे स्थापित कराया। अब शहर में घुसते ही लगने लगा कि अच्छा कार्य हुआ है।
*सांसद ने पहले के माननीयों का तोड़ा मिथक*
सांसद मेनका गांधी हर महीने कम से कम चार-पांच दिन जनपद में रहकर क्षेत्र का भ्रमण करते हुए विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण के साथ विकास कार्यों की समीक्षा तथा जनसुनवाई के माध्यम से जनता के समस्याओं का निराकरण कराने का कार्य करती चली आ रही हैं। उनके इस कार्यशैली की विपक्षी दल के लोग भी सराहना करते हैं।विपक्षी दलों के नेताओं का मानना है कि सांसद मेनका गांधी भारतीय जनता पार्टी के नीतियों सिद्धांतों और कार्यशैली को अपनाते हुए लोगों के हित में अपनी ओर से एक अलग मुकाम बनाए हुए हैं।उन्होंने जनसुनवाई के दौरान फरियादियों से कभी उनकी जाति-धर्म नहीं पूछा।
जो भी उनके पास गया उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए सीधे प्रशासनिक एवं पुलिस विभाग के साथ विकास विभाग एवं अन्य विभागीय अधिकारियों से सीधे फोन कर मामले का निस्तारण करने का निर्देश देने का काम किया है। उनके 4 साल के कार्यकाल को देखा जाए तो वह कभी विवादों में नहीं रही। यह अलग बात है कि सोशल मीडिया या कुछ अन्य चैनल एवं अखबार के लोग उनके बयानों को अपने हिसाब से पेश करने का कार्य किए हैं। उनके कार्य की सराहना जनपद वासी बहुत ही बेबाकी से करते हैं। सांसद ने अब तक के निर्वाचित हुए सांसदो को पीछे छोड़ते हुए जिले की जनता से सीधा संवाद कायम रखा है। ऐसा बहुत कम हुआ है कि सांसद को खोजने के लिए लोगों को उनके पास दिल्ली जाना पड़ा हो। वह खुद समय-समय पर जिले में आती रही है। जिले से कई लोग सांसद बने लेकिन वह जनता के बीच कम गए। सांसद ने जिले में जनता से संवाद बनाने और उनकी समस्या का समाधन कराने के लिए अपने प्रतिनिधि रणजीत सिंह को जिम्मेदारी सौंपी है। उनके द्वारा लोगों की बातों को सांसद से बराबर अवगत कराया जाता है।
सांसद सांसद मेनका गांधी ने जनपद में कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए समय-समय पर अफसरों को निर्देश देती रही है।जनपद का भारतीय जनता पार्टी का संगठन भी उनके साथ मजबूती से खड़ा है।यह बात अलग है कि कुछ नेता अपने को उनके समानांतर लाकर खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन उनका यह कार्य केवल सीमित दायरे में ही है। जनता उन्हें सांसद मेनका गांधी के अपेक्षा पसंद नहीं कर रही है। जनपद में लोकसभा का चुनाव करीब एक साल होने को रह गया है। चुनावी बिसात बिछना शुरू हो गई है। सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के मुकाबले देश स्तर पर बने इंडिया गठबंधन को लेकर अब राजनीतिक कयास शुरू हो गए हैं । लेकिन जनपद की करीब 60 फ़ीसदी जनता का यह मानना है कि सांसद मेनका गांधी भले ही एनडीए गठबंधन की प्रत्याशी के रूप में फिर से सुल्तानपुर से लोकसभा के प्रत्याशी होंगी तो जीतेंगी। जनता उनके कार्य की काफी सराहना कर रही है। इसलिए लोग भारतीय जनता पार्टी से अलग हटकर भी उनको चुनने गुरेज नहीं कर रही है।जनपद में इंडिया गठबंधन का खाका अभी तैयार नहीं हो सका है। ना ही सांसद मेनका गांधी के मुकाबले कोई ऐसा चेहरा सामने आया है कि जिससे लगने लगे की सांसद मेनका संजय गांधी को आने वाले लोकसभा चुनाव में उससे कोई खतरा पैदा हो सकता है।







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