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बुधवार, 2 अगस्त 2023

मणिपुर में कानून व्यवस्था ध्वस्त, कोर्ट में आकर जवाब दें डीजीपी, पूछा, 6000 FIR में चंद ही गिरफ्तारियां क्यों

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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, 6000 एफआईआर में चंद ही गिरफ्तारियां क्यों

आरोप पुलिसकर्मिंयों पर भी है, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली

मणिपुर में महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाए जाने के केस में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की जांच को सुस्त बताया। मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था बिलकुल ध्वस्त हो चुकी है। कोर्ट ने हैरानी जताई कि राज्य की जातीय हिंसा में लगभग तीन महीने तक एफआईआर ही दर्ज नहीं की गई। बाद में जब 6000 से ज्यादा एफआईआर हुईं, तो इनमें चंद गिरफ्तारियां की गईं।सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि महिला के बयान में कहा गया है कि उसे पुलिस ने भीड़ को सौंप दिया था, क्या आरोपी पुलिसवालों पर कोई कार्रवाई हुई? क्या इतने महीनों में डीजीपी ने कोई कदम उठाया? क्या उन्होंने पुलिस अधिकारियों से पूछताछ की? सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर डीजीपी को कोर्ट में हाजिर होकर इन सभी सवालों का जवाब देने का निर्देश दिया है।

एफआईआर में देरी पर केंद्र ने कोर्ट से कहा कि मणिपुर में हालात बेहद खराब हैं। सीजेआई ने कहा कि कोर्ट को बताया जाए कि घटना कब हुई, जीरो एफआईआर कब हुई, उसे नियमित एफआईआर में कब बदला गया, बयान कब लिए गए, गिरफ्तारी कब हुई, क्या आरोपियों को एफआईआर में नामजद किया गया। हम इसके आधार पर आगे की जांच पर आदेश देंगे। इसपर सॉलिसीटर जनरल मेहता ने कहा कि सोमवार तक का समय दे दें। इससे अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा करने का समय मिल जाएगा। सीजेआई ने कहा कि ठीक है, सोमवार, सात अग्स्त को दोपहर दो बजे सुनवाई होगी। इससे पहले कुकी महिलाओं से रेप और हत्या के मामले में याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट वृंदा ग्रोवर ने कहा कि यह रिपोर्ट कानून के खिलाफ है। इसमें पीडि़त महिलाओं के नाम हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को तुरंत निर्देश दिया कि इस रिपोर्ट को किसी से शेयर मत करना। मीडिया को मत देना। नहीं तो पीडि़तों के नाम सामने आ जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि हम अपनी कॉपी में करेक्शन कर लेंगे। इस पर केंद्र ने कहा कि हमने इसे किसी से शेयर नहीं किया है। हमारे पास हमारी कॉपी है और एक कॉपी सिर्फ बैंच के सामने रखी गई है।

सुनवाई तक सीबीआई के बयान लेने पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार सुबह केंद्र को आदेश दिया कि सुनवाई पूरी होने तक सीबीआई वायरल वीडियो केस की पीडि़ताओं के बयान न ले। बैंच ने कहा कि एजेंसी सुनवाई पूरी होने का इंतजार करे। सोमवार को सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता ने सुझाव दिया था कि हाई पावर कमेटी मामले की जांच करे, जिसमें महिलाएं भी हों।

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