मणिपुर में जातीय हिंसा के तहत भीड़ द्वारा स्त्रियों को वस्त्र विहीन कर जुलूस निकालना, गैंग-रेप करना और विरोध करने पर इस सब अक्षम्य पापों का वीडियों बनाना तथा उनके परिवार वालों की हत्या कर देना! और तो और इन महिलाओं को बचाने आई, स्थानीय पुलिस का दंगाइयो का रौद्र रूप देखकर भाग खड़े होना! भीड़ के रूप में शामिल उक्त निशाचरों के कुकृत्य के बारे में आज घटना के 78 दिन बाद संसद में विपक्षी पार्टियों द्वारा हंगामा करने पर, प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा कड़ा रुख अपनाने पर मणिपुर के मुख्यमंत्री द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके यह तर्क दिया गया कि वीडियो मिडिया में आने के बाद ही हमको यह ज्ञात हुआ कि ऐसा जघन्य अपराध हुआ है! इतने बड़े पाप को ढाई महीने से ज्यादा समय तक छिपाये रखने के आरोप में वहां के थानेदार से लेकर डीजीपी तक तथा मुख्यमंत्री से लेकर केंद्रीय गृहमंत्री तक सभी पाप के भागी हैँ, इन लोगों को एक क्षण भी अपने पदों पर रहने का अधिकार नहीं है!







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