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मंगलवार, 13 सितंबर 2022

सभा में गहलोत के मंत्री पर फेंके गए जूते-चप्पल, सचिन पायलट पर तंज कसते हुए बोले- लड़ने आऊंगा तो एक ही बचेगा


protest
अशोक चांदना के समर्थकों का दावा है कि जूते चप्पल फेंकने वाले लोग सचिन पायलट के समर्थक थे। अब इसी पर अशोक चांदना ने सचिन पायलट पर तंज कसा है। अपने ट्विटर संदेश में अशोक चांदना है लिखा कि मुझ पर जूता फकवाकर सचिन पायलट यदि मुख्यमंत्री बने तो जल्दी से बन जाए क्योंकि आज मेरा लड़ने का मन नहीं है।

राजस्थान में हाई पॉलिटिकल ड्रामा लगातार जारी है। राजस्थान के पुष्कर में गुर्जर आरक्षण समिति के मुखिया रहे स्वर्गीय कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की अस्थियों का विसर्जन करने से पहले एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से लाखों की संख्या में गुर्जर आए थे। हालांकि, इस कार्यक्रम में विवाद खड़ा हो गया और भारी हंगामा। दरअसल, श्रद्धांजलि संदेश पढ़ने के लिए अशोक गहलोत की सरकार में मंत्री अशोक चांदना को बुलाया गया। अशोक चांदना पर गुर्जर समाज के लोगों ने जूते-चप्पल फेंकने की शुरुआत कर दी। इस दौरान मंच पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, बीजेपी नेता राजेंद्र राठौड़ सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। 

अशोक चांदना के समर्थकों का दावा है कि जूते चप्पल फेंकने वाले लोग सचिन पायलट के समर्थक थे। अब इसी पर अशोक चांदना ने सचिन पायलट पर तंज कसा है। अपने ट्विटर संदेश में अशोक चांदना है लिखा कि मुझ पर जूता फकवाकर सचिन पायलट यदि मुख्यमंत्री बने तो जल्दी से बन जाए क्योंकि आज मेरा लड़ने का मन नहीं है। जिस दिन मैं लड़ने पर आ गया तो फिर एक ही बचेगा और यह मैं चाहता नहीं हूँ। साफ तौर पर अशोक चांदना ने अपने ट्वीट के जरिए सचिन पायलट को बड़ी चुनौती दी है। इसके अलावा अशोक चांदना ने राजेन्द्र राठौड़ पर भी निशाना साधा। 

अशोक चांदना ने लिखा कि आज एक अद्भुत नजारा देखने को मिला 72 शहीदों के मारने के आदेश देने वाले (तत्कालीन मंत्रिमंडल सदस्य) राजेन्द्र राठौड़ साहब के मंच पर आने पर तालिया बजी और जिनके परिवार के लोग आंदोलन में जेल गए उन पर जूते फेंके गए। उन्होंने आगे कहा कि जिस मंच पर जूते फेंके गए उस पर शहीदों के परिवारजन बैठे थे कम से कम उनका तो ख्याल कर लेते। कर्नल साहब की अंतिम स्मृति को ऐसे कलंकित करने वाले लोग कितना दूर तक जाएंगे यह तो वक्त बताएगा। वहीं, जवाब में राजेन्द्र राठौड़ ने लिखा कि दूसरों पर तोहमत लगाने से पहले अपने गिरेबान में झांक कर देखो, आखिर हुजूर यह हालत क्यों बनी? दूसरों की पकी हुई फसल को काटकर अगर अपने खेत पर ले जाओगे तो परिणाम ऐसे ही निकलेंगे। अभी तो आगे-आगे देखो होता है क्या।

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