गोरखपुर । शाहपुर थाने के हिस्ट्रीशीटर रामनाथ निषाद ने रविवार को प्रेसवार्ता के माध्यम से राजस्व विभाग और रेलवे को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों ने मिलकर काश्तकारों की जमीन को रेलवे की बताते हुए रेलवे के अधिकारियों और रेल सुरक्षा बलों की मौजूदगी में उसका सीमांकन करते हुए तमाम मकानों पर एनईआर लिख दिया जिससे लोगों दहशत है। रामनाथ निषाद ने प्रेसवार्ता के माध्यम से राजस्व कर्मियों पर कार्यवाही की मांग किया और कहा कि उन मकानों पर बुलडोजर चलने के बजाए उन कर्मचारियों और अधिकारियों पर बुलडोजर चलना चाहिए जिन्होंने गलत सीमांकन कर मकानों पर एनईआर लिखवा दिया।
विश्वस्त सूत्रों के हवाले से आपको बताते चलें कि शाहपुर थाने का हिस्ट्रीशीटर रामनाथ निषाद जमीनों का बड़ा कारोबारी है और झरनाटोला के आसपास स्थित जमीनों की दलाली से बड़ी धन सम्पत्ति का अर्जन किया है।
रेलवे की जिस भूमि के सीमांकन की बात की जा रही है वह जमीन रामनाथ ने ही लोगों को दिलाया है जिनमे से कुछ ने अपने जीवनभर की कमाई खर्च करते हुए मकानों के भी निर्माण कर लिया है। ऐसे मकानों की संख्या चार से अधिक है जबकि इतनी ही संख्या में रेलवे के खाते की खाली भूमि भी कुछ लोगों को बेची गई है।
झरनाटोला में जब रेलवे की भूमि वाले मामले में हमारे संवाददाता ने हकीकत जानने के लिए कुछ लोगों से सम्पर्क किया तो दबी जबान लोगों ने एयरफोर्स की भी कुछ जमीनों को इसी तरीके से भोले भाले लोगों को बेचे जाने की बात कही।
वही इस मामले में राजस्व विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी ने बताया कि रामनाथ निषाद का ये कहना कि राजस्व विभाग ने गलत तरीके से रेलवे की जमीनों का सीमांकन किया है, ये बिल्कुल गलत है। उनका कहना है कि जिलाधिकारी के पत्र पर जो कार्यवाही की गई है उसके सम्बन्ध में जमीनों के दस्तावेज में रेलवे का नाम अंकित है और उच्च न्यायालय ने भी उक्त भूमि पर रेलवे के पक्ष में आदेश जारी किया है।
कुल मिलाकर पूर्वोत्तर रेलवे के उप मुख्य इंजीनियर के जिलाधिकारी को लिखे जिस पत्र के आधर पर राजस्व विभाग द्वारा जमीनों और मकानों का सीमांकन करते हुए रेलवे का बताया जा रहा है उन सबकी जांच की जरूरत है।
मामले में शामिल जालसाजों पर जांचोपरांत कार्यवाही की जरूरत है जिसके कारण झरनाटोला और आसपास रहने वालों ने इन जमीनों पर अपनी ज़िंदगीभर की कमाई लगा दिया है लेकिन अब सरकारी बुलडोज़र के डर से उनका सुकून और चैन छीन गया है।
बहरहाल थाने के हिस्ट्रीशीटर और जमीन का कारोबारी रामनाथ निषाद द्वारा पुलिस की नाक के नीचे सरकारी विभाग पर निशाना साधने का अंदाज़ ये बताने के लिये काफी है कि उसकी हनक कायम है।






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