नामिनी न होने से उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के लिए आवेदनों की भरमार
कोविड पीरियड में कइयों की असमय मौत हो जाने से अपनों पर आया संकट
बैंक में जमा पैसे निकालने पर पता चला कि नहीं है नामिनी
नामिनी न होने से बनवाना पड़ रहा है उत्तराधिकार प्रमाण पत्र
गोरखपुर । पादरी बाजार की रहने वाली सावित्री देवी के पति की मौत मई में कोरोना संक्रमण के चलते हो गई थी। मौत के कुछ महीने बीत जाने के बाद सावित्री देवी घर पर रखे पति के नाम के 26 लाख की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) को बैंक ले गईं तो पता चला उसमें कोई नॉमिनी ही नहीं है।
नॉमिनी न होने पर बैंक प्रबंधक ने उत्तराधिकार प्रमाण पत्र लाने के बाद ही भुगतान की व्यवस्था बताई। प्रबंधक के कहे अनुसार सावित्री ने उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के लिए कोर्ट गईं और औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद जब कोर्ट फीस सुना तो दंग रह गईं। अधिवक्ता ने बताया कि 26 लाख के लिए उन्हें 2.20 लाख रुपये का कोर्ट फीस जमा करना होगा और अधिवक्ता का खर्च अलग। कोई रास्ता न देख मजबूरन सावित्री ने 2.20 लाख रुपये उधार लेकर जमा करा दिए। नॉमिनी न कराने की चूक केवल सावित्री पर ही भारी नहीं पड़ी, इस तरह की आर्थिक चोट कइयों को लग रही है। बशारतपुर की रहने वाली अनामिका शुक्ला को भी इसी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र बनवाने के लिए डेढ़ लाख रुपये बतौर कोर्ट फीस जमा करना पड़ा।
कोरोना महामारी ने लाखों लोगों को असामयिक मौत के मुंह में धकेल दिया है। कई मामले ऐसे भी आए हैं जिसमें व्यक्ति द्वारा नॉमनी नहीं बनाने के कारण परिवार को वित्तीय लाभ नहीं मिल पाया है। इस तरह की परेशानी से बचने के लिए वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि हर किसी को अपने सभी निवेश में नॉमनी बनाना चाहिए। अगर, किसी ने नहीं बनाया है तो बिना देरी किए नॉमिनी बना लें। अधिवक्ता जगदीश्वर दयाल मिश्रा ने बताया कि नॉमिनी का मतलब उस व्यक्ति से है जिसे आपने अपने न रहने की स्थिति में निवेश की रकम संभालने के लिए नॉमित किया है। नॉमिनी का चयन व्यक्ति की आसमायिक मौत के बाद की प्रक्रिया को आसान बना देता है। नॉमिनी न होने की स्थिति में पैसा मिलना मुश्किल होता है। कानूनी दांवपेच में लंबा समय निकल सकता है।
इन वित्तीय मामलों में नॉमनी जरूरी
जीवन बीमा, पीपीएफ, ईपीएफओ, बैंक-डाकघर के सभी खाते, डीमैट खाते, नेशनल पेंशन स्कीम, म्यूचुअल फंड, प्रॉपटी और अब कार-बाइक के रजिस्ट्रेशन में नॉमिनी जरूरी किया गया है।
परिवार के सदस्य को नॉमिनी बनाना बेहतर
अधिवक्ता जगदीश्वर दयाल मिश्रा ने बताया कि नॉमनी अपने जीवन साथी (पति/पत्नी) अपने बच्चे, आपके माता-पिता, परिवार का कोई और सदस्य या फिर अपने किसी खास मित्र को भी बनाया सकता है। हालांकि, मित्र की जगह हमेशा परिवार को तवज्जो देनी चाहिए। ऐसा इसलिए कि बाद में कोई परेशानी न हो।
--एक साथ तीन नॉमिनी बनाना संभव
कई मामले ऐसे भी मिले हैं जिसमें पिता ने अपने किए निवेश में तीन लड़के होने के कारण किसी को नॉमिनी नहीं बनाया। बाद में उनको परेशानी का सामना करना पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि कई जगह आसानी से तीन नॉमिनी आसानी से बना सकते हैं और सबके शेयर भी पहले से विभाजित कर सकते हैं। अगर आप नहीं रहते हैं तो बाद में उसमें जमा पैसा तीनों में बराबर बांट दिया जाता है।
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इन नियमों की जानकारी जरूरी
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नॉमिनी नाबालिग तो अभिभावक नियुक्त करना जरूरी
एक से ज्यादा नॉमिनी नियुक्त कर सकते हैं
नॉमिनी को कई बार बदल सकते हैं
नॉमिनी हमेशा संपत्ति का हकदार नहीं होता है
नॉमिनी बनाने पर भी वसीयत बनाना जरूरी
नॉमिनी है पर वसियत नहीं तो संपत्ति का बंटवारा कानून के हिसाब से होगा
विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संकट नॉमिनी के साथ आपको अपना एक लीगल वसीयत भी तैयार करानी चाहिए। अगर आपकी कोई लीगल वसीयत है तो आपके सभी तरह के जमा, निवेश आसानी से आपके उत्तराधिकारियों को मिल जाएंगे।






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