योगी आदित्यनाथ का जन्म उत्तराखंड के सामान्य राजपूत परिवार में हुआ था। पिता आनंद सिंह बिष्ट और माता सावित्री देवी हैं। योगी ने 1989 में ऋषिकेश के भरत मंदिर इंटर कॉलेज से 12वीं पास की थी। 1992 में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित में बीएससी की। जब वह स्नातक कर रहे थे, तभी राम मंदिर आंदोलन शुरू हो गया और वह छात्र जीवन में ही वह राममंदिर आंदोलन से जुड़ गए।
*छात्र जीवन में ही राम मंदिर आंदोलन से जुड़ गए*
90 के दशक में राममंदिर आंदोलन के दौरान ही योगी आदित्यनाथ की मुलाकात गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक कार्यक्रम हुई थी। इसके कुछ दिनों बाद योगी अपने माता-पिता को बिना बताए गोरखपुर जा पहुंच है। उन्होंने संन्यास धारण करने का निश्चय लेते हुए गुरु दीक्षा ले ली। महंत अवैद्यनाथ भी उत्तराखंड के रहने वाले थे। उन्होंने अजय सिंह बिष्ट को योगी आदित्यनाथ बना दिया।
*अवैद्यनाथ ने अजय सिंह को आदित्यनाथ बनाया*
गोरखनाथ मंदिर के महंत की गद्दी का उत्तराधिकारी बनाने के चार साल बाद ही महंत अवैद्यनाथ ने योगी आदित्यनाथ को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी भी बना दिया। गोरखपुर से महंत अवैद्यनाथ चार बार सांसद रहे। उसी सीट से योगी 1998 में 26 वर्ष की उम्र में लोकसभा पहुंचे। वह गोरखपुर से लगातार 2017 तक पांच बार सांसद रहे।
*संसद में भी सख्त हिंदूवादी चेहरे के रूप में उभरे*
सियासत में कदम रखने के बाद योगी आदित्यनाथ की छवि एक कठोर हिंदुत्ववादी नेता के तौर पर उभरकर सामने आई। उन्होंने सांसद रहते गोरखपुर जिले को अपने नियम अनुसार चलाने और त्वरित फैसलों से सबको चकित किया। इसी के चलते योगी के सियासी दुर्ग को न तो मुलायम सिंह का समाजवाद भेद पाया और न ही मायावती की सोशल इंजीनियरिंग काम कर पाई। गोरखपुर में हमेशा योगी का हिंदुत्व कार्ड ही हावी रहा।







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