मुर्गी पालन व्यवसाय से जुड़े कृषको को मुर्गियों की अनेक प्रकार की रोग बीमारियों का सामना करना पड़ता है । उनके उचित देखरेख में कमी या समय उपचार न मिलने के कारण उन्हें आर्थिक हानि भी उठानी पड़ जाती है। महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र पीपीगंज गोरखपुर के पशुपालन विशेषज्ञ डॉ विवेक प्रताप सिंह बताते हैं कि मुर्गियों का प्रबंधन अच्छे तरीके से करने से उनको मुर्गी पालन में होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। डॉ सिंह बताते है कि कोराइजा या जुखाम मुर्गियों में होने वाली एक घातक बीमारी है । इस बीमारी में सांस नली के ऊपरी हिस्से में सूजन आ जाती है, यह बहुत जल्दी फैलने वाली बीमारी है, इसमें नाक बहता हैं। आमतौर पर 15 से 20 हफ्ते की मुर्गियों पर इसका असर होता है, इससे मुर्गी पालकों को काफी हानि होती है। यह बीमारी कीटाणु से फैलती है, *बीमारी फैलने का मुख्य कारण कम जगह में ज्यादा मुर्गियां रखना, मकान कम हवादार होना तापमान में एकाएक बदलाव, बादल युक्त नमी वाला मौसम, लीटर में सीलन आदि* । यह मुर्गी फार्म में पाई जाने वाली मुख्य बीमारियों में से एक है । प्रमुख लक्षण: इस बीमारी के होने पर थोड़े समय में ही पूरा फार्म प्रभावित होता है । सबसे पहला लक्षण नाक से रेशा बहना है, जो बाद में गाड़ा व बदबूदार हो जाता है, इसके साथ साथ आंखें भी फूल जाती हैं मुर्गियां आंखों को पैरों पर रगड़ती रहती हैं, जिसे पैरों पर धब्बे पड़ जाते हैं । मुर्गियां सुस्त पड़ जाती हैं, दाना कम खाती हैं, इनके पंख फूले-फूले नजर आते हैं, मुर्गिया अपना सिर बार-बार हिलाती रहती हैं । उनकी हालत जल्दी बिगड़ जाती है, खासकर छोटे बच्चों की काफी मृत्यु हो जाती है तथा बड़ी मुर्गियों में अंडा उत्पादन क्षमता काफी घट जाती है।
उपचार: सबसे पहले ऊपर दिए गए कारणों को दूर करने का उपाय करें । बीमार मुर्गियों को स्वस्थ मुर्गियों से अलग करें। दाने व पानी में सल्फा की दवा मिलानी चाहिए, सल्फाथेलाजोल 1.5 प्रतिशत मुर्गी के दाने में मिलाने से मुर्गियों को आराम मिलता है। सल्फामीजाथीन 0.1 प्रतिशत के हिसाब से पानी में देने से या सलमेट आदि देने से बीमारी पर काबू पाया जा सकता है, दाने में सल्फाड्रग्स 5 से 7 दिन तक दें । एंटीबायोटिक्स जैसे हेस्टासाइक्लिन, ऐरोमाईसीन, रोशीलीन, पुलमौक्सिन या फुरासोल आदि 1 लीटर पानी में 1 ग्राम मात्रा के हिसाब से दें । बीमारी से रोकथाम के लिए मुर्गी फार्म में पूरी तरह साफ सफाई रखें, पानी व दाने के बर्तन ठीक प्रकार से हर रोज साफ करें। मुर्गियों को संतुलित आहार दें, कम जगह में अधिक मुर्गियां कभी ना रखे, मुर्गियों में पेट के कीड़े ना आने दे, मुर्गी घरों में हवा के आने जाने का पूरा प्रबंध करें तथा बिछावन सुखा रखें । यदि मुर्गी पालक इस बातों का ध्यान रखेंगे तो मुर्गियों को बखूबी इन बीमारियों से बचा सकेंगे






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