लखनऊ। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के टोल प्लाजा पर कथित तौर पर गुप्त सॉफ्टवेयर के जरिए करोड़ों रुपये की वसूली किए जाने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED की लखनऊ जोनल टीम ने शुक्रवार को सात राज्यों में एक साथ छापेमारी की। वाराणसी समेत सात राज्यों में कुल 14 ठिकानों पर जांच की गई।
जांच के केंद्र में शिवा बिल्डटेक से जुड़े लोगों और उसके मालिकों के ठिकाने बताए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ टोल प्लाजा पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकृत सॉफ्टवेयर के समानांतर एक दूसरा गुप्त सॉफ्टवेयर चलाया जा रहा था। इस व्यवस्था के जरिए टोल से होने वाली वास्तविक वसूली में कथित हेरफेर किए जाने की आशंका जताई गई है।
सूत्रों के मुताबिक, यह मामला 200 से अधिक टोल प्लाजा से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां कथित तौर पर करीब 100 करोड़ रुपये के वित्तीय खेल की जांच की जा रही है। हालांकि, जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद ही पूरे मामले में धनराशि और संलिप्त लोगों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बताया जा रहा है कि मिर्जापुर के अतरौला टोल प्लाजा पर STF की कार्रवाई के दौरान समानांतर सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल का खुलासा हुआ था। इसी जांच में सामने आए तथ्यों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अब ED ने मनी लॉन्ड्रिंग समेत वित्तीय अनियमितताओं के एंगल से जांच तेज कर दी है।
ED की टीम छापेमारी के दौरान डिजिटल उपकरणों, दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन और सॉफ्टवेयर से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है। कार्रवाई पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।







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