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बुधवार, 28 मई 2025

सड़क मरम्मत के नाम पर छह करोड़ की हेराफेरी, जांच में हुआ खुलासा, जेई सस्पेंड

 


*लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों द्वारा नई सड़क की मरम्मत  करवाने के नाम पर 6 करोड़ की धोखाधड़ी की गई है। पढ़िये डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

निधि कुशवाहा

Updated On: 12 May 2025 ,


देवरिया! यूपी के देवरिया जिले से सड़क मरम्मत और चौड़ीकरण के नाम पर हुए बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। जहां लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों द्वारा नई सड़क की मरम्मत करवाने के नाम पर 6 करोड़ की धोखाधड़ी की गई है। इस मामले में जूनियर इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया गया है।


डाइनामाइट न्यूज़ के संवाददाता के अनुसार, कप्तानगंज-हाटा-गौरीबाजार-रुद्रपुर मार्ग के चौड़ीकरण और हाटा-गौरीबाजार-रुद्रपुर मार्ग के सुदृढ़ीकरण के लिए लोक निर्माण विभाग ने शासन से छह करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कराई थी। लेकिन जांच में यह खुलासा हुआ कि यह राशि पूरी तरह से अनावश्यक थी, क्योंकि संबंधित सड़कें पहले से ही चाक-चौबंद हालत में थीं। इस मामले ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


जेई को किया गया निलंबित


इस मामले में जूनियर इंजीनियर (जेई) राम गणेश पासवान को निलंबित कर दिया गया है। जांच में खुलासा हुआ कि मार्च 2023 में विभागीय अधिकारियों ने कप्तानगंज-हाटा-गौरीबाजार-रुद्रपुर मार्ग की मरम्मत के लिए 6.8 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा था, जिसे मुख्यालय के अधिकारियों ने बिना किसी जांच के मंजूर कर लिया। हालांकि, राशि के बंटवारे को लेकर जेई, सहायक अभियंता (एई), और अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) के बीच विवाद हो गया, जिससे यह घोटाला सामने आया।


जांच में कैसे हुआ खुलासा


बता दें कि कुशीनगर के नेहुआ नौरंगिया के कप्तानगंज-हाटा-गौरीबाजार-रुद्रपुर, भभौली बाईपास के पास 88 किलोमीटर की यह सड़क है। जो कि कुशीनगर और देवरिया जिले को जोड़ती है। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए मंडलीय अधीक्षण अभियंता, गोरखपुर की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया। समिति ने अपनी जांच में पाया कि सड़क मरम्मत और चौड़ीकरण के लिए मांगी गई राशि का कोई औचित्य नहीं था। जांच रिपोर्ट को अग्रिम कार्रवाई के लिए शासन को भेजा गया, जिसके बाद लोक निर्माण विभाग ने अपनी साख बचाने के लिए पूरी छह करोड़ रुपये की राशि शासन को वापस कर दी। इस मामले में शासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अवर अभियंता राम गणेश पासवान को दोषी ठहराया और उन्हें निलंबित कर मुख्य अभियंता, गोरखपुर के कार्यालय से संबद्ध कर दिया। सूत्रों के अनुसार, इस मामले में कुछ अन्य अधिकारियों पर भी जल्द ही कार्रवाई हो सकती है।


अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग, अनिल कुमार जाटव ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि कप्तानगंज-हाटा-गौरीबाजार-रुद्रपुर मार्ग के चौड़ीकरण और हाटा-गौरीबाजार-रुद्रपुर मार्ग के सुदृढ़ीकरण के लिए छह करोड़ रुपये के बजट की स्वीकृति प्राप्त की गई थी। उन्होंने दावा किया कि जांच समिति ने इस प्रकरण की गहन जांच की और उसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई। अनिल कुमार जाटव ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में शासकीय धन की कोई हानि नहीं हुई है, क्योंकि पूरी राशि शासन को वापस कर दी गई है। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग ने इस मामले में नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की है और आगे भी ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।

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