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शनिवार, 8 जून 2024

साल 1996: भाजपा-कांग्रेस नहीं,माया-जया का जमाना था, पढ़िए किंगमेकरों की कहानी

 



नई दिल्ली।साल 1996 में 11वीं लोकसभा चुनाव के नतीजों ने सियासी पंडितों को कन्फ्यूज कर डाला था।जनादेश इस कदर बंटा था कि सरकार कैसे बनेगी यह सवाल था। भारतीय जनता पार्टी के वोट नहीं बढ़े थे, लेकिन सीटें 40 बढ़ गई थीं। भाजपा 161 के नंबर के साथ नंबर-1 पार्टी थी।कांग्रेस की बुरी गत हुई थी।देश की इस सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने वोट शेयर में अपने जिंदगी की सबसे बड़ी गिरावट देखी थी।वोट 30 पर्सेंट से नीचे जा टिका था। कांग्रेस से लगभग 8 पर्सेंट कम वोट पाने वाली भाजपा सरकार गठन की तैयारी में थी, लेकिन असली फायदा क्षेत्रीय क्षत्रपों को हुआ था।मायावती के वे सुनहरे दिन थे। 2 पर्सेंट वोट उनके खाते में जुड़े थे।यूपी में बसपा का वोट शेयर बढ़कर 20 हो गया था और दूसरे क्षेत्रीय दलों को भी 3 पर्सेंट वोटों का फायदा हुआ था।यह था देश में गठबंधन की राजनीति के सबसे पेचीदा और रोमांचक दौर का ट्रेलर।जिसकी पिक्चर अगले पूरे पांच साल चली।


*सियासत के इतिहास में 1996 का वे दौर*


साल 1996 और देश में 13 दिन की सरकार ये देखते ही आपके जहन में भी अटल बिहारी वायपेयी की उस सरकार का किस्सा ताजा हो गया होगा जब 13 दिन में ही उनकी सरकार गिर गई थी।गौर करने वाली बात यह है कि ये सरकार सिर्फ भाजपा की नहीं थी।इस सरकार में क‌ई और दल शामिल थे। 1996 में हुए लोकसभा चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला था।ये कहानी है गठबंधन के उस दौर की जब भाजपा 161 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल बनकर उभरी थी. जबकि कांग्रेस 140 सीटों के साथ दूसरा बड़ा दल थी, लेकिन कांग्रेस ने तो पहले ही सरकार न बनाने का फैसला ले लिया, वजह थी कांग्रेस के कई बड़े नेता का अलग पार्टी बना लेना।इसीलिए ज्यादा सीटें इन क्षेत्रीय दलों के पाले में चली गई।लोकसभा की 543 सीटों में से 129 क्षेत्रीय दलों के पास थीं।अब सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते तत्कालीन राष्ट्रपति ने अटल बिहारी वाजपेयी को सरकार बनाने का न्योता दिया। 16 मई 1996 इतिहास की वो तारीख जब अटल बिहारी वाजपेयी देश के 13वें प्रधानमंत्री तो बने,लेकिन लोकसभा में बहुमत साबित न कर सके और उनकी सरकार गिर गई।


*कब बनी संयुक्त मोर्चा की पहली सरकार*


फिर बनी संयुक्त मोर्चा के गठबंधन वाली सरकार। 1 जून 1996 को जेडीएस के एचडी देवेगौड़ा 13 दलों के संयुक्त मोर्चा गठबंधन के सहयोग से सरकार बनाने में कामयाब तो हो गए, लेकिन उनकी सरकार भी महज 18 महीने ही चल सकी। 21 अप्रैल 1997 ये वो तारीख है जब देवेगौड़ा की सरकार में विदेश मंत्री रहे इंद्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री बने।इंद्र कुमार गुजराल भी 11 महीने ही इस पद पर रह सके।इसके बाद गठन हुआ एनडीए का। 1998 में मध्यावधि चुनाव कराने पड़ गए और अब वह समय था जब एनडीए के सहयोग से अटल बिहारी वाजपेयी फिर से प्रधानमंत्री बने। इस बीच अटल बिहारी वाजपेयी के सामने लोकसभा में बहुमत साबित करने की चुनौती आ गई।विश्वास मत के दौरान एनडीए गठबंधन की साथी AIADMK की जयललिता ने सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया और सरकार फिर गिर गई। अटल बिहारी वाजपेयी 13 अक्टूबर 1999 में फिर से प्रधानमंत्री बने।


*क्या था 13 दलों का संयुक्त मोर्चा*


साल 1996 में जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार 13 दिनों में गिर गई।उसके बाद 13 दलों ने मिलकर संयुक्त मोर्चा बनाया। 1996 और 1997 में देश में संयुक्त मोर्चा के सहयोग से दो सरकारें बनीं। इस मोर्चा की पहली सरकार 1997 तक चली।पहली बार पीएम एचडी देवेगौड़ा बने और उनके इस्तीफे के बाद इंद्र कुमार गुजराल ने सत्ता संभाली।जनता दल, समाजवादी पार्टी, डीएमके, तमिल मनिला कांग्रेस, असम गण परिषद और टीडीपी समेत 13 दल संयुक्त मोर्चा में शामिल थे। 1998 के लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का गठन हुआ, जिसे आज सभी एनडीए के नाम से जानते हैं।


*गठबंधन सरकार का चलन कितना पुराना*


देश में एक बार फिर से मोदी सरकार बनने जा रही है, हालांकि यह सिर्फ भाजपा की सरकार नहीं, बल्कि एनडीए सरकार होगी।एनडीए 41 दलों का वो गठबंधन है, जिसकी अगुवाई भाजपा कर रही है।हालांकि ये पहली बार नहीं है जब देश में गठबंधन की सरकार बन रही है। 2014 से लेकर अब तक भी गठबंधन में ही देश की सरकार चलती आ रही है। गठबंधन की सरकारों का चलन दशकों पुराना है।

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