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शुक्रवार, 8 मार्च 2024

दुग्धेश्वर नाथ का मंदिर की महिमा पौराणिक क्यों?




*पुराणों से लेकर ह्वेनसांग की पोथी तक में लिखी है देवरिया के दुग्धेश्वरनाथ की महिमा, महाकाल के ज्योतिर्लिंग से भी है नाता

  रुद्रपुर में स्थित बाबा दूधेश्वर नाथ के शिवलिंग को उज्जैन के महाकाल का उप ज्योतिर्लिंग माना जाता है ।इस शहर को सतासी राज ने बसाया था। सावन में यहां विशेष पूजा की जाती है। मंदिर का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है।

    

देवरिया।

 'छोटी काशी' के नाम से मशहूर उत्तर प्रदेश खे देवरिया जिले के रुद्रपुर स्थित बाबा दूधेश्वर नाथ का शिवलिंग महाकालेश्वर उज्जैन का उप ज्योतिर्लिंग माना जाता है। रुद्रपुर कस्बे और मंदिर का इतिहास सैंकड़ों साल पुराना है। यह स्थान दधिची और गर्ग ॠषियों की तपोस्थली भी माना जाता है। बाबा दुग्धेश्वरनाथ अनादि स्वयं भू-चंडलिंग हैं। इस सप्तकोसी इलाके में 11 अन्य शिवलिंग भी हैं। सावन और अधिक मास में यह पूरा क्षेत्र ही शिवमय हो जाता है। गोरखपुर गजेटियर में भी इसका उल्लेख मिलता है और चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपनी यात्रा में इसका वर्णन किया है ।

    स्वयंभू शिवलिंग के रूप में है बाबा दूधेश्वर नाथ

देवरिया जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर रुद्रपुर कस्बे को सतासी स्टेट के नाम से जाना जाता है। इस नगर को सतासी स्टेट के राजा वशिष्ठ सेन ने बसाया था। नगर के एक किनारे पर देवाधिदेव महादेव बाबा दूधेश्वर नाथ का मंदिर स्थित है। बताया जाता है कि 20 एकड़ के एरिया में स्थित इस मंदिर का निर्माण राजा ने कराया था और वह स्वयं यहां पूजा किया करते थे। धर्म ग्रंथों में दो तरह के शिवलिंग (वाणलिंग तथा चंड लिंग) माने गए हैं। बाबा दुग्धेश्वरनाथ अनादि स्वयं भू-चंडलिंग हैं। नीसक पत्थर से बने यहां के शिवलिंग को महाकालेश्वर उज्जैन का उपज्योर्तिलिंग माना जाता है।

     चीनी यात्री ह्वेनसांग की यात्रा में भी मिलता है बाबा का उल्लेख

बाबा दुग्धेश्वरनाथ को महाकालेश्वर के द्वादश ज्योर्तिलिंगों का उपलिंग कहा जाता है। द्वादश उपलिंगों की स्थापना के बाद उपज्योर्तिलिंगों की स्थापना की गई। इनमें रुद्रपुर के बाबादुग्धेश्वर नाथ की पहली स्थापना मानी जाती है। 11वीं शताब्दी में अष्टकोण में बने इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग की लंबाई धरातल से लगभग 15 फीट नीचे तक है। रुद्रपुर में बाबा दुग्धेश्वर नाथ का उल्लेख एलेक्जेंडर ने गोरखपुर गजेटियर में भी किया है।साथ ही चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपनी यात्रा में इसका उल्लेख किया है। मान्यता है कि इस शिवलिंग के स्पर्श मात्र से ही कष्ट दूर हो जाते हैं। पद्म पुराण में महादेव के बारे में लिखा गया है, 'महाकालस्य यल्लिंगम दुग्धेशमिति विश्रुतम।'

    दधीचि और गर्ग ऋषि की तपस्थली के रूप में है मान्यता

देवाधिदेव भगवान शिव के नाम से मशहूर पवित्र नगरी रुद्रपुर के समीप स्थित तमाम गांव भगवान शिव के नाम से बसे हैं। रुद्रपुर के आसपास के कई गांव भगवान शिव के नाम से जाने जाते हैं। जैसे- रुद्रपुर, गौरी, बैतालपुर, अधरंगी, धतुरा, बौड़ी गांव। सावन और अधिक मास में क्षेत्र शिवमय हो जाता है। भगवान शिव के महिमा से यह क्षेत्र प्रभावित रहा है। भक्त अपनी मनोकामना को लेकर बारह महीने यहां जलाभिषेक करते हैं लेकिन फाल्गुन मास में महाशिवरात्रि के दिन बड़ी संख्या में भक्त जलाभिषेक करने आते हैं।

     यह स्थान दधिचि और गर्ग ॠषि की तपोस्थली माना जाता है। सावन के महीने में हजारों की संख्या में शिव भक्त बरहज स्थित सरयू नदी से जल भरकर लाते हैं और बाबा दूधेश्वर नाथ का जलाभिषेक करते हैं ।देश , विदेश के पर्यटक यहां आते हैं।इस मंदिर पर रुद्राभिषेक व भगवान शिव की पूजा व अराधना साल के 12 महीने होता है।

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