लखनऊ - अपने खेतों और निजी भूमि पर पौधे लगाने वाले किसानों को सरकार जल्द कुछ राहत दे सकती है। कुछ और प्रजातियों के पेड़ उस फेहरिस्त से बाहर किए जा सकते हैं, जिन्हें काटने के लिए वन विभाग से अनुमति लेनी होती है। फिलहाल, प्रदेश में पेड़ों की 29 ऐसी प्रजातियां हैं, जिन्हें बिना पूर्व अनुमति के नहीं काटा जा सकता। इसके अलावा सभी प्रकार के पेड़ बिना किसी पूर्व स्वीकृति के काटे जा सकते हैं।
निजी भूमि पर पौधरोपण बढ़ना जरूरी यूपी की बात करें तो ऐसी 29 प्रजातियां हैं, जिनके लिए पूर्व अनुमति जरूरी है। शासन ने यह व्यवस्था 31 दिसंबर 2025 तक के लिए कर रखी है। हालांकि अब प्रदेश में जिस तरह वन्य अभ्यारण्य और टाइगर रिजर्व की संख्या बढ़ रही है, ऐसे में संरक्षित क्षेत्र बढ़ रहा है। प्रदेश का हरित आवरण बढ़ाने के लिए निजी भूमि पर वृक्षारोपण बढ़ाने का ही विकल्प है।
इन 29 प्रजातियों के लिए चाहिए अनुमति
आम (देशी/तुकमी), नीम, साल, महुआ, बीजासाल, पीपल, बरगद, गूलर, पाकड़, अर्जुन, पलाश, बेल, चिरौंजी, खिरनी, कैंथा, इमली, जामुन, असना, कुसुम, रीठा, भिलावा, तून, सलई, हल्दू, बाकली/करधई, धौ, खैर, शीशम व सागौन।
पेड़ के व्यास के हिसाब से मिलेगी अनुमति
अभी तक 29 प्रजातियों के पेड़ों के लिए अमूर्त कारण तय थे। इस लिस्ट में एक मूर्त कारण भी शामिल कर लिया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक अनुश्रवण द्वारा इस संबंध में आदेश भी दिया जा चुका है। इसके अनुसार सभी 29 प्रजातियों के पेड़ों का व्यास तय कर दिया गया है।






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