गोरखपुर। शहर के प्रतिष्ठित जव्वाद अली शाह इमामबाड़ा गर्ल्स पीजी कॉलेज के लिपिक मंगलवार को कॉलेज के गेट पर आमरण अनशन पर बैठ गए । कर्मचारियों का आरोप है कि कार्यवाहक प्रधानाचार्य ने 17 महीने से इनका वेतन रोक दिया है जिससे इनकी पारिवारिक स्थिति खराब हो गई है।
वही प्रधानाचार्य आसिया जमाल ने कहा कि लिपिक के खिलाफ शिकायत मिली थी जिस पर कार्रवाई करते हुए उनका वेतन रोका गया है और मामले की जांच चल रही है रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि मैनेजमेंट के लोग अपने रिश्तेदारों को कालेज में नियुक्ति देकर मनमाने तरीके से वेतन दे रहे हैं उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पीएचडी करने के बाद लगभग 14 से 15 सालों से यहां पढ़ाने वाले संविदा अध्यापकों का वेतन लगभग ₹8000 है वही संविदा पर नियुक्त किए गए इन लिपिकों का वेतन ₹15000 है जो यहां के संविदा टीचरों के साथ एक तरह का अन्याय है।
सबसे मजेदार बात ये रही कि आमरण अनशन पर बैठे कर्मचारियों के समर्थन में मैनेजमेंट के एक जिम्मेदार भी बैठे नज़र आये लेकिन जब उनसे समर्थन की बात पूछी गई तो उन्होंने अनशन स्थल से किनारा कर लिया।
आपको बता दें कि 3 जुलाई को इमामबाड़ा गर्ल्स पीजी कॉलेज के लिपिक अरीना बेग और मुस्तकीम अली ने प्रेस वार्ता करके आरोप लगाया था कि प्रधानाचार्य ने दो लाख रुपये लेकर इनकी नियुक्ति की थी और अब अपने हठधर्मिता से इनका वेतन निर्गत नहीं किया जा रहा है।
कर्मचारियों के आमरण अनशन की सूचना प्रधानाचार्य ने कोतवाली पुलिस को दी।
मौके पर पहुंचे नखास चौकी प्रभारी चंद्रभान सिंह व उप निरीक्षक आशीष यादव से अनशन पर बैठे कार्यालय अधीक्षक शोएब खान लिपिक अलीना बैग और मुस्तकिम अली से गर्मी गरमा बहस भी हुई। पुलिस ने आमरण अनशन की परमिशन पर सवाल उठाए जिस पर कर्मचारियों ने कहा कि हमने इसकी सूचना पहले उच्च अधिकारियों को दे दी थी।
वहीं घटना की सूचना पर पहुंचे अपर नगर मजिस्ट्रेट राजेश वर्मा ने कर्मचारियों का ज्ञापन लेकर आमरण अनशन को समाप्त कराया और उच्च अधिकारियों से उनकी बात पहुंचाने का आश्वासन दिया।






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