देश में डीजल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति संकट ने परिवहन क्षेत्र पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। ट्रांसपोर्ट संगठनों के अनुसार, बढ़ती लागत और कई राज्यों में डीजल की अनियमित उपलब्धता के कारण करीब 19 लाख ट्रक सड़कों से हट गए हैं। इसका सीधा प्रभाव माल परिवहन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर पड़ रहा है। ट्रांसपोर्टरों ने मालभाड़े में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है, जिससे आने वाले दिनों में आम जनता को महंगाई का और बड़ा झटका लग सकता है।
देश में अधिकांश माल परिवहन सड़क मार्ग से होता है और ट्रकों की बड़ी संख्या में आवाजाही रुकने से सप्लाई चेन प्रभावित होने लगी है। फल, सब्जी, अनाज, दूध, राशन, दवाइयां और रोजमर्रा की जरूरत का सामान समय पर मंडियों और बाजारों तक नहीं पहुंच पा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि परिवहन खर्च बढ़ने से वस्तुओं की कीमतों में तेजी आना तय है। कई शहरों में फल और सब्जियों के दाम पहले ही बढ़ने लगे हैं। खासकर दूरदराज के इलाकों में इसका असर ज्यादा देखने को मिल रहा है।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि डीजल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जबकि टोल टैक्स, बीमा और रखरखाव की लागत भी बढ़ चुकी है। ऐसे में पुराने भाड़े पर ट्रक चलाना घाटे का सौदा बन गया है। कई छोटे ट्रांसपोर्टर और ट्रक मालिक अपने वाहन खड़े करने को मजबूर हो गए हैं। उनका कहना है कि सरकार को डीजल पर टैक्स कम करना चाहिए और परिवहन क्षेत्र को राहत पैकेज देना चाहिए, ताकि माल ढुलाई सामान्य बनी रहे।
हालांकि तेल कंपनियों ने देश में बड़े स्तर पर ईंधन संकट की खबरों को पूरी तरह सही नहीं माना है। कंपनियों का कहना है कि डीजल की कमी केवल कुछ इलाकों तक सीमित है और आपूर्ति व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कहीं भी घबराने जैसी स्थिति नहीं है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील भी की है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो इसका असर महंगाई दर पर भी दिखाई देगा। परिवहन लागत बढ़ने से हर क्षेत्र प्रभावित होगा, क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक सड़क परिवहन पर निर्भर करती है। उद्योग जगत ने भी सरकार से जल्द हस्तक्षेप की मांग की है।
फिलहाल आम जनता की नजर सरकार और तेल कंपनियों के अगले कदम पर टिकी हुई है। यदि डीजल की कीमतों और आपूर्ति की समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है तथा बाजार पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।







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