देवरिया!पुलिस लाइन सेवा प्रेक्षा गृह में विशेष किशोर पुलिस यूनिट (एस.जे.पी.यू.) की मासिक समीक्षा बैठक माह-जुलाई का आयोजन किया गया। बैठक की समीक्षा ओम प्रकाश तिवारी, डिप्टी लीगल डेफेंस प्रतिनिधि, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा की गई। कार्यक्रम का संचालन जय प्रकाश तिवारी, संरक्षण अधिकारी, जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा किया गया।
राष्ट्रपति कर रहे ओम प्रकाश तिवारी द्वारा एस.जे.पी.यू. कर्तव्य एवं दायित्व के बारे में वैज्ञानिक और किशोर न्याय अधिनियम के संरचनात्मक कार्य करने की जानकारी दी गई। सभी दस्तावेजों पर एक पृथक्करण रजिस्टर एवं आंकड़े के रख-रखाव के लिए बाल मैत्री पंजिका बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
बैठक में जय प्रकाश तिवारी द्वारा एजेंडावार की ओर से की गई चर्चा में जिले के सभी नारे से खोए-पाए बच्चों के मामले में बच्चों की बरामदगी और उनके बारे में जानकारी प्राप्त की गई। इसके साथ ही रिलेटेड एनालमोल डायमंड (1098) पर डॉक्यूमेंटेशन के विषय में बताया गया है कि बच्चों से एलेक्जेंडर सोलर पैनल (1098) के बारे में सूचित किया जा सकता है। यदि कोई बाल कथा कथा प्राप्त हो या बाल कल्याण पुलिस अधिकारी द्वारा भेजी गई हो तो संबंधित प्रकरण को 24 घंटे के लिए समय पर देखने के लिए बाल कल्याण समिति की बैठक प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
बाल श्रम ने बच्चों को प्रभावित किया और बाल कल्याण समिति की आवश्यकता पर चर्चा हुई। बाल भिक्षावृत्ति एवं बाल विवाह प्रकरणों में तत्काल कार्रवाई, बाल संरक्षण इकाईयों से समन्वय, बाल कल्याण समिति एवं न्यायालय को सूचना देना, बाल मैत्रीपूर्ण व्यवहार अपनाना, विधिक सहायता सहायता समन्वय, पृथक्करण बाल मैत्री रजिस्टर एवं आंकड़ों का रख-रखाव, सारांश प्रविष्टि जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में दिनेश मिश्र, प्रभारी थाना ए.एच.टी.यू. बाल विवाह, बाल श्रम एवं बाल भिक्षावृत्ति के कई उदाहरण प्रस्तुत कर जानकारी दी गई है तथा संबंधित आश्रम, बाल श्रम एवं बाल भिक्षावृत्ति एवं संरक्षण के बारे में बताया गया है।
बैठक में डाॅ. संजय गुप्ता, स्टूडियो मेडिकल ऑफिसर, स्वास्थ्य विभाग द्वारा बच्चों की उम्र एवं मेडिकल परीक्षण के दौरान आने वाली समस्याओं में सहायता प्रदान करने की बात कही गई और अपना मोबाइल नंबर साझा किया गया।
विभा पांडे एवं जागृति ओझा, सहायक व्यक्ति बाल कल्याण समिति के द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले पाक्सो एपिसोड में अपनी भूमिका निभाते हुए कहा गया है कि यदि बाल कल्याण पुलिस अधिकारी को लगे कि सहायक व्यक्ति की आवश्यकता है, तो वह बाल कल्याण समिति को आकर्षित कर सकते हैं।
नवीन भारती, प्रबंधक, एवं मीनू मिशेल, मनोवैज्ञानिक, वन स्टॉप सेंटर द्वारा बताया गया कि पीड़ित महिलाओं/बाल सहायकों को सक्षम अधिकारी की अनुमति से ही केंद्र पर अधिकतम 5 दिन तक रखा जा सकता है।
अनुराधा राज, प्रभारी समन्वयक, एलएलसी द्वारा स्थापित लाइन के कार्य की जानकारी दी गई एवं सी.यू.जी. नंबर साझा किया गया।
बैठक में अनिल कुमार सोनकर, जिला परिषद् अधिकारी, अरविंद कुमार यादव, आकाश सिंह कुशवाहा, सत्यपाल चौहान (आरक्षी, थाना ए.एच.टी.यू.) एवं सभी बाल कल्याण पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।









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