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बुधवार, 22 मई 2024

सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के पाँचवें दिन श्रीकृष्ण बाल लीला का वर्णन सुन श्रद्धालु मंत्र मुग्ध।

 





भगवान की लीलाएं मानव जीवन के लिए प्रेरणादायक ।

 भागवत आचार्य दासानूदास लीला दास जी महाराज के श्री मुख से कथा सुन श्रोता भाव विभोर।।


रूद्रपुर देवरिया । क्षेत्र के खोरमा 

ग्राम में जौरहरी ब्रह्म जी के पवित्र स्थान पर कथा व्यास भागवत आचार्य दासानूदास  लीला दास जी महाराज के मधुर वाणी से चल रही सप्तदिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में पांचवें 

 दिन श्रीकृष्ण बाल लीला, कालियानाग मर्दन तथा गोवर्धन पूजा का सुंदर चित्रण किया गया। कथावाचक श्रीमद्भागवताचार्य पूज्य लीला दास जी महाराज  ने श्रीमद्भागवत की आरती के बाद भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला, माखन चोरी तथा गोवर्धन पूजा की कथा श्रद्धालुओं को सुनाया । उन्होंने कहा कि भगवान की लीलाएं मानव जीवन के लिए प्रेरणादायक हैं। भगवान कृष्ण ने बचपन में अनेक लीलाएं की। कथा में पूतना चरित्र का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि भगवान कृष्ण के पैदा होने के बाद कंस उसको मौत के घाट उतारने के लिए अपनी राज्य की सर्वाधिक बलवान राक्षसी पूतना को भेजता है। पूतना वेश बदलकर भगवान श्रीकृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण उसको मौत के घाट उतार देते हैं। कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा पूतना वध करने के बाद चारों तरफ उनकी जय-जयकार होने लगी। कथा में आगे बताया कि एक बार गोप बालकों ने जाकर यशोदामाता से शिकायत कर दी–’मां तेरे लाला ने माटी खाई है, यशोदा माता हाथ में छड़ी लेकर दौड़ी आयीं। ‘अच्छा खोल मुख।’ माता के ऐसा कहने पर श्रीकृष्ण ने अपना मुख खोल दिया। श्रीकृष्ण के मुख खोलते ही यशोदाजी ने देखा कि मुख में चर-अचर सम्पूर्ण जगत विद्यमान है। इसके अलावा भी श्री कृष्ण जी की माखन चोरी आदि बाल-लीलाओं का वर्णन किया । उन्होंने कालियानाग मर्दन के प्रसङ्ग को सुनाते हुए कहा कि कालिया नाग के आतंक से सभी लोग व्यथित थे। उसी दौरान ग्वालों के साथ गेंद खेलते समय भगवान श्रीकृष्ण ने गेंद को यमुना नदी में फेंक दिया और उसके बाद उसे निकालने के बहाने उसका मर्दन कर दिया। कालिया नाग के मान मर्दन की कथा सुन पण्डाल में श्रीकृष्ण के जयकारे लगने लगे। कथा व्यास ने बताया कि जब ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा छोडकर गिरिराज जी की पूजा शुरू कर दी, तो इंद्र ने कुपित होकर ब्रजवासियों पर मूसलाधार बारिश की, तब कृष्ण भगवान ने गिरिराज को अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की और इंद्र का मान मर्दन किया। तब इंद्र को भगवान की शक्ति का अहसास हुआ और इंद्र ने भगवान से क्षमा मांगी । कथा व्यास द्वारा श्रीकृष्ण बाल लीलाओं का बृत्तांत सुनकर भक्त गण भाव विभोर हो गए। इस अवसर पर यजमान रामेश्वर मणि त्रिपाठी, कृष्णानंद मणि त्रिपाठी, भोलानाथ मिश्र,

अभिषेक मिश्रा,  कृत्यानंद त्रिपाठी, आसाराम त्रिपाठी, सरस चंद जायसवाल, अखिलेश्वर त्रिपाठी, गंगेश्वर त्रिपाठी, श्रीमती पद्मावती देवी, राम कृपाल मद्धेशिया सहित काफी संख्या में ग्रामीण श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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