*UP में बाराबंकी के किंतूर गांव में पसरा सन्नाटा
*ईरान के 1979 की इस्लामी क्रांति के जनक और पहले सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी (Ayatollah Khomeini) का उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से सीधा पुश्तैनी नाता* है। उनके दादा सैयद अहमद मूसवी बाराबंकी के किंतूर गांव के रहने वाले थे, जो 1830 के आसपास अवध के नवाब के साथ यात्रा पर निकले और बाद में ईरान के खुमैन में बस गए।
*किंतूर में जुड़ाव:* आज भी बाराबंकी के किंतूर गांव में खुमैनी के वंशज/काजमी परिवार के लोग और 'सैयद वाड़ा' नाम से जाना जाने वाला क्षेत्र है।
*ऐतिहासिक संदर्भ:* 1978 में जब ईरान में शाह का शासन था, तो उन्होंने खुमैनी को 'भारतीय मूल का मुल्ला' कहकर बदनाम करने की कोशिश की थी, लेकिन यह दांव उल्टा पड़ा और इससे उनकी लोकप्रियता बढ़ी।
बाराबंकी की सिरौली गौसपुर तहसील में स्थित किंतूर गांव का नाम अचानक चर्चा में आ गया है। बताया जाता है कि खामेनेई के दादा सैयद अहमद मुसावी हिंदी 18वीं-19वीं सदी के दौरान इसी गांव में रहते थे। परिवार ने अपनी जड़ों की पहचान बनाए रखने के लिए अपने नाम के साथ ‘हिंदी’ उपनाम जोड़ा था।
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यहां आज भी कुछ पुराने दस्तावेज और पुश्तैनी मकानों की यादें मौजूद हैं, जिनसे इस ऐतिहासिक संबंध का पता चलता है। जैसे ही सोशल मीडिया और टीवी चैनलों के जरिए हमले और मौत की खबर गांव पहुंची, लोग अपने घरों में बैठकर खबरें देखने लगे। खबर मिलते ही *किंतूर गांव में सन्नाटा छा* गया। स्थानीय निवासी सैय्यद निहाल मियां ने नम आंखों से कहा कि यह सिर्फ ईरान का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का नुकसान है। उनके मुताबिक, खामेनेई को लोग एक बड़े धार्मिक और राजनीतिक नेता के रूप में जानते थे।
डॉ. रेहान काजमी ने भी दुख जताते हुए कहा कि यह बहुत बड़ी क्षति है। गांव में कई लोग इसे *“इतिहास का दर्दनाक पल” बता रहे* हैं। लोग आपस में बैठकर पुराने रिश्तों और इस ऐतिहासिक जुड़ाव की चर्चा कर रहे हैं।







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