देवरिया, 03 दिसंबर।जिलाधिकारी श्रीमती दिव्या मित्तल ने बताया है कि शीतलहर के दौरान पशुधन को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक ऊर्जा और आहार की आवश्यकता होती है। तापमान में उतार-चढ़ाव का प्रभाव भैंसों और मवेशियों की प्रजनन क्षमता पर भी पड़ सकता है, इसलिए पशुपालकों को साधारण सावधानियां अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि रात के समय ठंडी हवाओं के सीधे संपर्क से पशुओं को बचाने के लिए उनके आवास को उचित रूप से ढका जाना चाहिए। पशुओं एवं मुर्गियों को ठंड से बचाने के लिए आवश्यकतानुसार गर्माहट की व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही पशुधन के आहार में सुधार करते हुए उच्च गुणवत्ता वाले चारे, चरागाह और वसायुक्त खुराक का उपयोग लाभदायक रहता है। आहार सेवन तथा चबाने के व्यवहार पर भी ध्यान देना चाहिए।
पशुओं के लिए जलवायु-अनुकूल शेड तैयार किए जाएं, ताकि सर्दियों में पर्याप्त सूर्य प्रकाश मिल सके। ठंड के मौसम में पशुओं के नीचे सूखा भूसा या अन्य बिछावन सामग्री अवश्य डाली जाए। स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल उपयुक्त नस्लों को अपनाना भी उपयोगी होता है।
उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि ठंड के दौरान पशुओं को खुले स्थानों पर न बांधें और न ही अनावश्यक रूप से घूमने दें। इस अवधि में पशु मेलों से बचना चाहिए तथा जानवरों को ठंडा चारा या ठंडा पानी देने से परहेज करना चाहिए। पशु आश्रय स्थलों में नमी और धुएं से बचाव की सामान्य व्यवस्था अवश्य हो। उन्होंने भी कहा कि मृत पशुओं के निस्तारण में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें और शवों को नियमित चराई मार्गों पर न फेंकें।







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