देवरिया। विकास खंड बैतालपुर के पशुधन प्रसार अधिकारी निशाकान्त तिवारी ने बताया कि खेतों के प्राकृतिक उर्वरता के लिए गोबर आवश्यक है। गोबर को खाद के रूप में इस्तेमाल करने से कृषि और पशुपालन के बीच एक सहजीवी संबंध स्थापित होता है। गोबर का उपयोग करके किसान एक चक्रीय प्रणाली बना सकते हैं, जिसमें पशुओं द्वारा उत्पन्न अपशिष्ट को मिट्टी में पुनर्चक्रित किया जाता है, जो फसलों के लिए मूल्यवान पोषक तत्व बन जाता है। पशुपालन और कृषि के बीच यह जुड़ाव अधिक टिकाऊ और एकीकृत कृषि पद्धति को बढ़ावा देता है।गोबर पोषक तत्वों से भरपूर जैविक पदार्थ है, जो इसे पौधों के लिए एक उत्कृष्ट उर्वरक बनाता है। इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम और सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे आवश्यक तत्व मौजूद होते हैं, जो पौधों के स्वस्थ विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये पोषक तत्व धीरे-धीरे मुक्त होते हैं, जिससे पौधों को निरंतर पोषण मिलता रहता है और पोषक तत्वों की कमी का खतरा कम हो जाता है।पोषक तत्व प्रदान करने के साथ-साथ, गोबर मिट्टी की भौतिक संरचना में भी सुधार करता है। मिट्टी में मिलाने पर यह उसकी जल धारण क्षमता और वायु संचार को बढ़ाता है। गोबर में मौजूद कार्बनिक पदार्थ मिट्टी में छिद्र बनाने में मदद करते हैं, जिससे पानी और हवा अधिक प्रभावी ढंग से प्रवेश कर पाते हैं, जड़ों के विकास को बढ़ावा मिलता है और मिट्टी का संघनन रुकता है।किसानों और बागवानों के लिए, गोबर रासायनिक उर्वरकों का एक किफायती विकल्प है।







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