का.दूधनाथ एक रोशनमिनार की तरह प्रेरक-स्तंभ का काम करेंगे!
मऊ। आज मजदूर किसान एकता मंच के तत्वावधान में अजोरपुर गांव (मर्यादपुर )में मऊ स्थित कामरेड दूधनाथ के घर के प्रांगण में कामरेड दूधनाथ की श्रद्धांजलि सभा और उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर आधारित स्मृति सभा संपन्न हुई ।
कार्यक्रम की शुरुआत में लाल झण्डे का ध्वाजारोहण करके उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पण करने के बाद दो मिनट का मौन रखा गया।
कार्यक्रम का संचालन भरत शर्मा ने करते हुए कहा कि कामरेड डा.दूधनाथ की विचार -यात्रा और जीवन-पध्दति हमारी अमूल्य धरोहर है।जब भी मजदूर-किसान आंदोलनों की बात आयेगी,तब दूधनाथ एक रोशनमिनार की तरह प्रेरक-स्तंभ का काम करेंगे।
स्मृति सभा में का. दूधनाथ से जुड़ी स्मृतियों को 'गांव-जवार' नामक अखबार में विशेषांक के रूप में प्रस्तुत करके विमोचन भी किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि कामरेड का सपना मजदूर किसान पक्षधर सचमुच के लोकतांत्रिक व्यवस्था के निर्माण का था। लेकिन मौजूदा दौर में शासक वर्ग अपने ही बनाये संविधान,लोकतंत्र को खत्म कर रहा है।इसीलिए उनके कठिन सपनों को जन एकजुटता के जरिए संघर्ष से ही पूरा होगा।
वक्ताओं ने बताया समाज के दबे-कुचले परिवार में जन्मे बहुत कठिनाईयों में कामरेड दूधनाथ उच्च शिक्षा प्राप्त की।लेकिन अमीर बनने का ख्वाब से अलग हटकर उन्होने कल-कारखानों ,गांव-जवार में किसानों-मजदूरों के बीच तमाम आंदोलनों का कुशल नेतृत्व किया। यह भी बताया गया कि कामरेड दूधनाथ सुशिक्षित, कुशल चिकित्सक, लोकप्रिय गायक, साहित्यकार, पत्रकार( बिगुल अखबार व दायित्व बोध पत्रिका के संपादक ),खंड काव्य,बिरहा व नाटक विधाओं के रचनाकार, सांस्कृतिक अखाड़ा के मार्गदर्शक रहे । हाल में पिछले वर्ष 4 अप्रैल 2021 को उनकी ही रचित 'विंदा' खंड महाकाव्य का विमोचन हुआ था ।वह कथनी-करनी दोनों स्तर पर समाज में फैली कुरीतियों,ढोंग-पाखंड, रुढ़ियों,अंधपरंपराओं का हमेशा डटकर विरोध किये।उनकी पत्नी रजुली देवी और कामरेड दोनों ने समाज में आदर्श दाम्पत्य जीवन प्रस्तुत किया। अपने पत्नी व बच्चियों को भी प्रेरित करते हुए आंदोलन का साथी बनाया। तभी मृत्यु की सूचना पाकर उत्तर भारत के विभिन्न जिलों से आए छात्र व किसान नेताओं, महिलाओं और ग्रामीणों ने मिलकर इंकलाबी नारों के साथ गृह निवास अजोरपुर में इकट्ठा हुए। मुखाग्नि का एक विशेष पहचान यह रहा कि कामरेड को मुखाग्नि देने का काम उनकी पुत्रियों ने किया। सभी ने इस नारे के साथ संकल्प लिया कि कामरेड दूधनाथ के सपनों को मंजिल तक पहुंचाएंगे ।
कार्यक्रम में प्रस्ताव पारित हुआ कि का.दूधनाथ के सम्पूर्ण रचनाओं को संकलित करके प्रकाशित किया जाएगा। प्रतिवर्ष का.दूधनाथ व उनकी पत्नी रजुली देवी दोनों की स्मृति सभा को एकसाथ एकदिन मनाया जायेगा।
कार्यक्रम में शिवाजी राय, चतुरानन ओझा,कन्हैया लाल,रजनीश भारती,क्रांति नारायण सिंह,अरविंद मूर्ति, राघवेंद्र,पारसनाथ, धर्मेंद्र व्यास,रामजी सिंह,कृपाशंकर,शिला, समीक्षा ,शिक्षा,जनार्दन,ओमप्रकाश शर्मा,इरफान, राजेश आज़ाद, भंते रामअवध राव,गौरीशंकर आचार्य,बृजेश आ़ज़ाद,अशोक कुमार ,राजेंद्र निषाद ,रवि प्रकाश, रामकिशन, सत्य प्रकाश ,कैलाश चौहान, नंदलाल गौड़ ,संदीप कुमार, सोना ,लालू ,बाबूराम, तेज बहादुर, धर्म चंद्र ,राजेंद्र प्रसाद, मंगल मौर्या, श्री कृष्ण, हरिहर यादव ,यशवंत, इंद्रदेव, प्रीति देवी ,मंजू देवी , सती रानी, कमलावती ,पूजा देवी, मुन्ना देवी, कलावती देवी ,बुधिया देवी, सुमित्रा देवी, पूनम देवी ,शारदा देवी,शनिचरी देवी,मोंगरी देवी ,सुनीता, राजेंद्र प्रसाद साहनी, हरिश्चंद्र राम ,मुन्ना भारती ,राम भवन प्रधान ,गोवर्धन राम गौतम,आनंद , एलबी शास्त्री, जवाहर लाल साहनी आदि रहे।






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