*नेपाल में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। आज से प्राइवेट स्कूलों को बंद कर दिया गया है और अब देश में प्रधानमंत्री से लेकर बड़े-बड़े अधिकारियों तक के बच्चे सरकारी स्कूलों में ही पढ़ेंगे।
सोचिए, जब देश चलाने वाले नेताओं और अधिकारियों के अपने बच्चे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे, तो क्या वे उन स्कूलों की हालत सुधारने के लिए मजबूर नहीं होंगे? क्या शिक्षा की गुणवत्ता अपने आप बेहतर नहीं हो जाएगी?
यह फैसला सिर्फ एक नियम नहीं है, बल्कि एक सोच है —
बराबरी की सोच, समान अवसर की सोच और शिक्षा में असली सुधार की सोच। जब आम जनता और खास लोगों के बच्चे एक ही स्कूल में पढ़ेंगे, तभी असली लोकतंत्र दिखाई देगा। तभी सरकारी स्कूलों की इमारत, पढ़ाई, शिक्षक और सुविधाएं बेहतर होंगी।







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