*गणतंत्र दिवस के अवसर पर सरस्वती वरिष्ठ माध्यमिक विद्या मंदिर देवरिया में आयोजित हुआ शारीरिक प्रदर्शन,
देवरिया।भारतीय संविधान को लागू करने और वास्तविक रूप से अपने सुराज की स्थापना का दिवस ही गणतंत्र दिवस हैं।आज के दिन ही भारत में भारतीयों के द्वारा बनाया गया संविधान लागू हुआ था।इसके पूर्व 25 जनवरी 1950 तक प्रीवी कौंसिल के कानून प्रभावी थे। भारतीय संविधान सभी के प्रति सम्मान, समानता और समरसता के भाव को व्यक्त करता है।यही कारण है कि भारत का संविधान समावेशी और जीवंत दस्तावेज कहा जाता है। उक्त बातें सरस्वती वरिष्ठ माध्यमिक विद्या मंदिर देवरिया खास के विशाल प्रांगण में आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए डा.सौरभ मालवीय जी(लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष, मंत्री ,विद्या भारती पूर्वी क्षेत्र )ने कही।
उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री मालवीय जी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष होने के नाते भी हम सभी का दायित्व है कि जिन आदर्शों और उद्देश्य के लिए परमपूज्य केशव जी संघ के बट वृक्ष का रोपण किया था,उसके मूल्य और आदर्श भी संविधान के प्राणतत्व हैं।सभी के प्रति मानवीय मूल्य युक्त व्यवहार,सभी को सम्मान,समानता और गरिमा प्रदान करना, भेदभाव, छुआछूत, संकीर्ण सोच को दूर करते हुए "राम को भजे सो राम का होई" के आदर्श को समाज में उतारने की जिम्मेदारी हम सभी की है।इसी सामाजिक संकल्पना के लिए अमर शहीदों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था।आज हमारे सामने चुनौती है कि हम अपने सभी बंधु बांधवों को साथ लेकर चलें जिससे एक मजबूत राष्ट्र के निर्माण का लक्ष्य पुरा हो।
कार्यक्रम में आए अतिथियों को श्रीफल और अंग वस्त्र देकर विद्यालय के अध्यक्ष श्री मुन्नीलाल शर्मा जी और प्रधानाचार्य श्री अनिरुद्ध सिंह जी ने सम्मानित किया। इसके पूर्व मुख्य अतिथि डा.सौरभ मालवीय जी ने राष्ट्रीय ध्वज का झंडारोहण कर तिरंगे को सलामी दी और मार्च पास्ट की सलामी ली। इस अवसर अतिथि गण द्वारा शहीदों के चित्रों पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गयी।विद्यालय के विशाल प्रांगण में उपस्थित हजारों छात्रों ने समवेत स्वर में राष्ट्रगान गाकर माहौल को राष्ट्रभक्ति से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम की अगली कड़ी में विद्यालय के छात्रों ने अपने शारीरिक प्रदर्शन के करतब दिखा कर वाहवाही लूटी।समता,योगचाप, सूर्य नमस्कार,के साथ संयम और संतुलन के तमाम करतब दर्शकों को दंग करने वाले थे। पिरामिड निर्माण औरअग्निचक्र में से उछाल लगा कर निकलने का प्रर्दशन सबसे ज्यादा रोमांचक था। सांस्कृतिक टीम ने विभिन्न गीतों पर काव्य -नृत्य की मनोरम प्रस्तुति से मन मोहा। संबोधन की कड़ी में प्रदेश निरीक्षक आदरणीय श्रीराम सिंह ने
उपस्थित छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में व्यक्तिगत सफलता महत्वपूर्ण है लेकिन इसके साथ ही साथ यह
भी महत्वपूर्ण है कि आपके जीवन ने सामाजिक समरसता और समाज की उन्नति मे कितना योगदान दिया है।केवल अपने लिए जीना ही जीवन नहीं है बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए जीवन महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के इंडोर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स का उद्घाटन मुख्य अतिथि द्वारा किया गया।यह इंडोर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स जनपद भर में अनूठा और खेल जगत के लिए एक सपने के सच होने जैसा है। उद्घाटन के अवसर पर संबोधित करते हुए डा.मालवीय जी ने कहा कि विद्या भारती के सर्वांगीण विकास के लक्ष्यों मे एक खेल विधा में पारंगत करना भी है।और उम्मीद है कि विभिन्न खेलों में और अच्छे प्रदर्शन करने में इंडोर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स सहायक होगा।इंडोर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में टेबलटेनिस, बैडमिंटन, कुश्ती, कबड्डी, शतरंज,खेल से संबंधित उच्च स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है।
कार्यक्रम के अंत में सभी के प्रति आभार ज्ञापित करते हुए विद्यालय के अध्यक्ष श्री मुन्नीलाल शर्मा जी ने सभी को गणतंत्र दिवस की बधाई दी।और आने वाली परीक्षाओं में सफलता की शुभकामनाएं दीं।इस अवसर पर शिशु शिक्षा समिति, गोरक्ष प्रांत के मंत्री आदरणीय प्रोफेसर शैलेश सिंह जी(विधि विभाग गोरखपुर विश्वविद्यालय) प्रबंधक श्री बैकुंठनाथ कुशवाहा जी, कोषाध्यक्ष श्री संतोष गोड़ जी,शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य श्री रविन्द्र कुमार श्रीवास्तव जी, राजेश गोयल जी, उपप्रधानाचार्य श्री अखिलेश दीक्षित जी,कौशल सिंह जी, जितेन्द्र मिश्र जी, अमरेन्द्र उपाध्याय जी, अरविंद मोहन मिश्र जी, यजुवेंद्र पति जी,हृदयलाल सिंह जी,अभिराम गुप्ता जी आदि समस्त आचार्य मौजूद रहे।







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