देवरिया में सरकारी तंत्र के लचर होने का फायदा अवैध प्लाॅटिंग करने वाले खूब उठा रहे हैं। अवैध प्लाॅटिंग को चिह्नित करने के बाद नियत प्राधिकारी कार्यालय नोटिस भेजने के बाद चुप्पी साध ले रहा है। इसके कारण अवैध काम करने वालों के चक्कर में आकर लोग जमीन, मकान के चक्कर में मेहनत की कमाई गांव दे रहे हैं।जनपद में सरकारी योजनाओं को रफ्तार नहीं मिल पा रही है। इसका लाभ अवैध धंधा करने वाले उठा रहे हैं। अगर लोगों को सरकारी सुविधाएं मिल जातीं तो वे धंधेबाजों के चक्कर में पड़ने से बच जाते।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने अवैध प्लाॅटिंग का काम करने वालों की सूची बनाने का निर्देश दिया था। इसके क्रम में करीब आठ लोगों की सूची भी बनाई गई थी और ध्वस्तीकरण की योजना बनाई। पर इसी बीच उनका स्थानांतरण हो गया और पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
करीब एक दशक पहले आवास विकास परिषद ने सिंधी मिल कालोनी को अपने कब्जे में लेकर आवास निर्माण कराने की योजना बनाई थी। पर मामला फाइलों तक रह गया। बाद में हालत यह हुई कि जमीन का काम करने वाले लोगों ने इस जमीन की खरीद-फरोख्त कर दी और काॅलोनी भी बस गई। पर अभी तक आवास विकास परिषद की योजना शहर में धरातल पर नहीं उतर पाई है। इसके कारण आवास विकास परिषद की योजनाएं जिले में नहीं आ पाईं।
2019 तत्कालीन जिलाधिकारी अमित किशोर ने विकास प्राधिकरण के लिए शासन को प्रोजेक्ट तैयार कर भेजा था। पर मानक पूरा न होने पर मामला अटक गया। इसके बाद 2023 जनवरी में तत्कालीन जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने नगर पालिका क्षेत्र में 23 गांवों के शामिल होने पर मानक पूरा होने का तर्क देते हुए एक बार फिर शासन को भेजा, लेकिन मामला अभी शासन में अटका हुआ है। अगर प्राधिकरण बन जाता तो लोगों को विश्वसनीय तरीके से आवास और भूमि लेने की सुविधा होती। इतना नहीं बंद, कालोनियों का विकास होता। लोगों को सड़क, जल निकासी आदि की सुविधा भी मिल जाती।







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