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गुरुवार, 1 सितंबर 2022

जनपद में 30 सितंबर तक राष्ट्रीय पोषण माह होगा आयोजित ................. डीएम ने दिशा निर्देशों और गतिविधियों के बारे में दी जानकारी

  

देवरिया,  01 सितंबर। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया है कि माह सितम्बर, 2022 को राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने बताया है कि पोषण अभियान एक बहु मन्त्रालयी कन्वर्जेन्स मिशन है, जो मा० प्रधानमन्त्री जी के विजन “सुपोषण भारत" (कुपोषण मुक्त भारत) पर आधारित है। पोषण अभियान के प्रभावशाली कियान्वयन हेतु जन आन्दोलन और सामुदायिक भागीदारी आवश्यक घटक हैं। उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति हेतु वर्ष 2018 से प्रत्येक वर्ष सितम्बर माह में सभी हित धारकों के अभिसरण के माध्यम से 'राष्ट्रीय पोषण माह मनाया जाता है। इसी क्रम में पंचम राष्ट्रीय पोषण माह सितम्बर, 2022 में पाये जाने का निर्णय लिया गया है, जिसमें कन्वर्जेन्स विभागों के समन्वय से ग्रामीण स्तर पर ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में गठित ग्राम पंचायत की विभिन्न समितियों के माध्यम से पोषण पंचायत आयोजित करते हुए पोषण अभियान को जन आन्दोलन से जन भागीदारी की ओर उन्मुख किया जाना है।
      जिलाधिकारी ने बताया है कि महिला एंव बाल विकास मन्त्रालय भारत सरकार द्वारा पोषण 2.0 के सम्बन्ध में विस्तृत दिशा निर्देश निर्गत किये गये हैं, जिसमें पोषण पंचायत, पोषण जन आन्दोलन तथा कन्वर्जेनस के माध्यम से आंगनबाडी केन्द्र को 'सक्षम' आंगनबाड़ी केन्द्र बनाने की प्रक्रिया पर विशेष महत्व दिया गया है। भारत सरकार से प्राप्त पोषण 2.0 के दिशा-निर्देश के क्रम में इस वर्ष के पोषण माह का मुख्य फोकस अंतर्विभागीय कन्वर्जेन्स स्थापित करते हुए पंचायत स्तर पर पोषणगतिविधियां संपादित की जानी है। सितम्बर 2022 में आयोजित किये जाने वाले पोषण माह का मुख्य थीम महिला और स्वास्थ्य, बच्चा एंव शिक्षा पोषण,पढ़ाई, लैंगिक संवेदनशीलता आधारित पेयजल संरक्षण एवं प्रबन्धन  जनजातिय क्षेत्रों में महिलाओं एंव बच्चों हेतु परम्परागत खाद्य समुह का प्रोत्साहन है। उक्त सभी थीम पर कार्य करने हेतु आई०सी०डी०एस० के साथ-साथ अन्य विभाग यथा- स्वास्थ्य, पंचायती राज, शिक्षा, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति, ग्राम्य विकास विभाग की अहम भूमिका है।
       जिलाधिकारी ने  दिशा-निर्देशों के साथ ही पोषण माह के दौरान सम्पादित की जाने वाली गतिविधियों के संबंध में बताया है कि पोषण पंचायत का गठन व क्रियाशीलता तथा पोषण पंचायत के माध्यम से पोषण गतिविधियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना पोषण पंचायत का मुख्य उद्देश्य गांव की महिलाओं को सशक्त करते हुए उनको स्वयं व अपने समुदाय के बच्चों एवं किशोरियों व अन्य महिलाओं को पोषित व स्वस्थ्य रखना है। पोषण पंचायत को क्रियाशील बनाने हेतु पोषण 2.0 के दिश निर्देशों तथा राज्य की स्थिति के दृष्टिगत निर्देश दिये गए हैं।पोषण पंचायत का गठन इसकी अध्यक्षा ग्राम समुदाय की अथवा स्थानीय महिला होगी। ग्राम प्रधान यदि महिला हो तो उनके माध्यम से अथवा ग्राम सभ की किसी एक महिला सदस्य की अध्यक्षता में पोषण पंचायत का गठन किया जायेगा। पोषण पंचायत के सदस्य के रूप में भी 10-15 महिलाओं को नामित किया जायेगा। ये महिलायें आई०सी०डी०एस० विभाग की लाभार्थी महिलायें अथवा आंगनबाड़ी केन्द्र के लाभार्थियों की अभिभावक हो सकती हैं। यहां यह भी आवश्यक है कि यह महिलायें समुदाय के वंचित समुह से हों, जिससे उनके प्रतिनिधित्व से समस्याओं का निराकरण हो सके।पोषण पचायत, गाम सभा के अधीनस्थ समिति के रूप में कार्य करेगी। पोषण पंचायत के सदस्य प्रत्येक माह बैठक का आयोजन करेगें। इस बैठक में आंगनबाड़ी कार्यकत्री की प्रतिभागिता अनिवार्य होगी। आशा कार्यकत्री को भी बैठक के लिये आमन्त्रित किया जायेगा।पोषण पंचायत की बैठक की जाएगी।   पोषण पंचायत के सदस्यों द्वारा कम वजन के शिशु सैम मैम व गम्भीर अल्प वजन के बच्चों के पोषण श्रेणी के स्तर में बदलाव की जानकारी ली जायेगी। पोषण पंचायत के सदस्य अनुपूरक पुष्टाहार की गुणवत्ता तथ उसकी नियमित वितरण की निगरानी करेगे।  गर्भावस्था के समय कितनी गर्भवती महिलाओं की सतत वजन की जांच हुई है, कितनी महिलायें कुपोषित हैं (प्रथम त्रैमास में बी०एम०आई० 18.05 से कम) अथवा एनीमिया से ग्रसित है तथा कितनी महिलाओं को स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ पोषण परामर्श प्राप्त हुआ है. इसकी जानकारी ली जायेगी।  नवजात शिशुओं के साप्ताहिक वजन व उनके घर आंगनबाड़ी कार्यकत्री / आशा द्वारा किये गये गृह भ्रमण की स्थिति का आंकलन किया जायेगा।  जन्म के समय कम वजन व 5 वर्ष से कम आयु के कुपोषित बच्चों की संख्या उसके कारणों, पोषण व्यवहारों में कमी, सेवाओं की पहुंच तथा उपलब्धता पर भी चर्चा की जायेंगी।मासिक आयोजित होने वाली समुदाय आधारित गतिविधियों में भी सदस्य प्रतिभाग कर सकते हैं।
      जिलाधिकारी ने पोषण माह की मुख्य गतिविधियां के संबंध में बताया है कि 'पोषण अभियान का शुभारम्भ पोषण माह का शुभारम्भ नियत तिथि पर जन प्रतिनिधियों द्वारा आमन्त्रित करते हुये किया जायेगा। जिस सम्बन्ध में जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा जन प्रतिनिधियों से समन्वय स्थापित कर शुभारम्भ की तिथि निधार्रित की जायेगी व तद्नुसार कार्यक्रम का सफल सम्पादन सुनिश्चित कराया जायेगा।सम्भव अभियान (स्वास्थ्य, पंचायती राज, खाद्य एवं रसद व ग्राम विकास विभाग के सहयोग से)- जुलाई से सितम्बर के मध्यम सम्भव अभियान का क्रियान्वयन पूरे प्रदेश में किया गया है। माह सितम्बर, 2022 में सम्भव अभियन का पहला चरण समाप्त होगा। जून-जुलाई 2022 तथा सितम्बर 2022 माह में चिन्हित किये गये सैम व गम्भीर अल्प वजन बच्चों को आवश्यक सेवायें जैसे स्वास्थ्य जांच व संदर्भन, समुदाय आधारित देखभाल, राशन कार्ड व मनरेगा जाब कार्ड की उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगा। इस सम्बन्ध में बाल विकास परियोजना अधिकारीगण द्वारा सैम व गम्भीर अल्प वजन बच्चों की सूची तैयार कर सम्बन्धित विभाग के विकास खण्ड स्तरीय अधिकारियों को उपलब्ध करायी जायेगी व नियमित अनुश्रवण करते हुए लाभान्वित कराने की कार्यवाही की जायेगी। साप्ताहिक गृह भ्रमण, सामुदायिक बैठक भी आयोजित की जायेंगी। जुलाई-अगस्त में साप्ताहिक थीम के अनुसार सम्भव अभियान में संदेश एवं अन्य प्रचार प्रसार सामग्रियों को आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को उपलब्ध कराया गया था। यह सभी संदेश जनपदों द्वारा पोषण माह के दौरान पुनः प्रयोग में लाये जा सकते हैं, क्योकि यह सभी संदेश कुपोषण के कारकों के साथ जुड़े हुए हैं और पोषण माह की प्राथमिकताओं में से हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का भी सहयोग सैम बच्चों की जांच हेतु लिया जा सकता है। पूर्व के दिशा निर्देशों क्रम में 25 सितम्बर-30 सितम्बर के मध्यम वजन सप्ताह का पुनः आयोजन करते हुए सभी 0-5 वर्ष के बच्चों की वजन और ऊँचाई / लम्बाई ली जायेगी। वजन सप्ताह की समस्त सूचना पोषण ट्रैकर तथा मासिक एम०पी०आर० में भी अंकित की जायेगी। वजन सप्ताह की सूचना स्वस्थ बाल प्रतियोगिता हेतु भी आवश्यक होगी। स्वस्थ्य बालक-बालिका प्रतियोगिता (स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से)- पोषण माह की यह एक प्रमुख गतिविधि है। इस गतिविधि का उद्देश्य सुपोषित उत्तर प्रदेश की परिकल्पना को साकार करना है। इस गतिविधि के आयोजन व इसकी सफलता में ग्राम प्रधान व पोषण पंचायत की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य 5 वर्ष तक के बच्चों पोषण स्तर में सुधार लाना, पोषण की महत्ता पर जागरूकता बढाना तथा एक स्वास्थ्य प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनाना है। शहरी मलिन बस्तियों में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के माध्यम से वृद्धि निगरानी का कार्य आयोजित किया जायेगा। वजन सप्ताह के आयोजन पश्चात जो बच्चा स्वस्थ्य व सुपोषित हैं तथा जिनको पूर्व निर्धारित सेवायें मिली हैं, उनको पुरस्कृत किया जायेगा। बच्चों को पुरस्कृत करने के मानक निर्धारित है
     जिस बच्चे को पुरस्कृत किया जाना है उसका चयन करने के लिये  ग्राम सभा के प्रतिनिधि, पोषण पंचायत के सदस्य, आंगनबाडी कार्यकत्री / सहायिका, ए०एन०एम० / आशा, स्थानीय शिक्षक को सदस्य हेतु ग्राम स्तर पर नामित किया जा सकता है। 
          
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