रुद्रपुर (देवरिया)। जिले में 15 मीटर से कम ऊँचाई वाले विद्यालय भवनों से भी फायर विभाग का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) अनिवार्य बताए जाने को लेकर पूर्वांचल वित्तविहीन शैक्षिक महासंघ (पीवीएसएम) ने गंभीर आपत्ति दर्ज की है। महासंघ ने इसे नियमों के विपरीत बताते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से जवाब तलब किया है।
राष्ट्रीय भवन संहिता (एनबीसी 2016) के अनुसार 15 मीटर से कम ऊँचाई वाले भवनों को फायर एनओसी से छूट है। इसी व्यवस्था को हालिया सुप्रीम कोर्ट के निर्णय जुपली लक्ष्मी कांता रेड्डी बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (SLP (Crl.) No. 9744/2024, निर्णय 10 सितम्बर 2025) में भी पूरे देश में बाध्यकारी बताया गया है। इसके बावजूद जनपद में छोटे विद्यालयों से एनओसी माँगे जाने पर महासंघ ने प्रश्न खड़ा किया है। पीवीएसएम अध्यक्ष राणा प्रताप सिंह ने कहा कि यदि उक्त प्रकार की अनिवार्यता लागू है, तो उसका वैधानिक आधार प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने जिले में संचालित मान्यता प्राप्त विद्यालयों को भेजे गए संबंधित पत्रों और निर्देशों की प्रमाणित प्रतियाँ सार्वजनिक करने की माँग की है।
महासंघ के अध्यक्ष राणाप्रताप सिंह ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत पाँच बिंदुओं पर जानकारी माँगी है, जिनमें सबसे अहम यह है कि 15 मीटर से कम ऊँचाई वाले विद्यालयों पर एनओसी दबाव क्यों? यदि कोई नियम नहीं है तो ऐसे दबाव का कारण और फाइल नोटिंग उपलब्ध कराई जाए। साथ ही अग्निशमन विभाग से हुए समन्वय से जुड़े सभी पत्राचार की प्रतियाँ भी माँगी गई हैं। महामंत्री संजय कुमार यादव ने कहा कि विद्यालयों में अग्नि सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन मनमाने नियम थोपकर भ्रम की स्थिति पैदा नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले ही आर्थिक दबाव झेल रहे विद्यालयों को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। वहीं मंत्री रविकांत मणि त्रिपाठी ने स्पष्ट कहा कि एनबीसी में जिन भवनों को छूट दी गई है, उनसे एनओसी माँगना बिलकुल अनुचित है। उपाध्यक्ष वीरेन्द्र यादव ने प्रशासन से स्पष्ट और न्यायसंगत दिशा-निर्देश जारी करने की माँग की है, ताकि विद्यालयों को राहत मिल सके। पीवीएसएम ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं हुआ तो मामला आगे बढ़ाया जाएगा। वहीं, अब सभी की निगाहें आरटीआई के जवाब पर टिकी हैं। जानकारी सामने आने के बाद ही इस विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।







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