बिजली सप्लाई के मामले में उत्तर प्रदेश की कंपनियां घटिया काम करती हैं. ऊर्जा मंत्रालय की तरफ से जारी रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है. देश की 52 कंपनियों की रिपोर्ट जारी की गई है, जिसमें यूपी की . कंपनियां पूरी तरह से फेल साबित हुई हैं. स्थिति यह है कि रेटिंग के 100 में उनको 15 नंबर मिल पाए हैं. केंद्र सरकार की तरफ से जारी रिपोर्ट में पांच में चार कंपनियों को 'C माइनस' ग्रेड मिला है जबकि एक कंपनी पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को C ग्रेड मिला है. सबसे अच्छा स्थान गुजरात, हरियाणा को मिला है और निजी सेक्टर की कंपनियों को मिला है.
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अब इस मामले के बाद कंपनियों को जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग है. दलील है कि इससे आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ेगी. डिस्कॉम में काम करने वाले उच्च अधिकारियों के खिलाफ इसको लेकर कार्रवाई होनी चाहिए. परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा का कहना है कि इससे पूरे प्रदेश की जनता को आने वाले दिनों में परेशानी झेलनी पड़ेगी. UP में बस पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम ही एक ऐसी कंपनी रही है, जिसको 15 से 35 के बीच नंबर मिला है. उसके अलावा कानपुर इलैक्ट्रिसिटी सप्लाई कम्पनी (केस्को), मध्यांचल विद्युत वितरण निगम, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को 'C माइनस' मिला है यानी कि इनके नंबर 15 या उससे भी कम है.






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