वहीं टीएमसी ने कोलकाता में कार्यकारिणी की बैठक में कांग्रेस की बैठक में शामिल नहीं होने का बहाना बनाया है. जबकि महाराष्ट्र में शिवसेना सांसद संजय राउत के घर पर शादी समारोह होने के कारण उनकी पार्टी और एनसीपी प्रमुख शरद पवार भी बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली नहीं आएंगे.
संसद के शीतकालीन सत्र से पहले कांग्रेस को सहयोगी दलों ने बड़ा झटका दिया है. क्योंकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), शिवसेना और एनसीपी ने संसद के शीतकालीन सत्र में केंद्र सरकार को घेरने के लिए विपक्ष को एकजुट करने की कांग्रेस की कोशिशों को दरकिनार किया है. आज बुलाई गई राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की बैठक में न तो टीएमसी और न ही शिवसेना और एनसीपी के सदस्य शामिल होंगे. इनके अलावा वाईएसआर कांग्रेस, बीजेडी, टीआरएस भी बैठक में शामिल नहीं होंगे.
टीएमसी की गैरमौजूदगी को कांग्रेस के साथ बिगड़ते संबंधों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, कांग्रेस के कई नेताओं के टीएमसी में शामिल होने के बाद पार्टी से ममता बनर्जी और टीएमसी पर सीधा हमला किया है. इसके साथ ही ममता बनर्जी ने इस बार दिल्ली दौरे के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने से भी परहेज किया था और उन्होंने कहा था कि किस संविधान में लिखा है कि दिल्ली दौरे पर सोनिया गांधी से मुलाकात की जाए. हालांकि खड़गे ने कहा कि टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन से उनकी बातचीत हुई है, लेकिन कोलकाता में टीएमसी कार्यकारिणी की बैठक के कारण उनके सदस्य नहीं पहुंच पाएंगे. उधर, एनसीपी नेता शरद पवार ने कहा कि शिवसेना सांसद संजय राउत के घर पर विवाह समारोह होने के कारण उनकी पार्टी और शिवसेना के सदस्य भी दिल्ली नहीं आ पाएंगे. खड़गे ने कहा कि वह पूरी कोशिश करेंगे कि सदन में अच्छे मुद्दों पर सभी विपक्षी दल सरकार के खिलाफ एकजुट खड़े होंगे.
सर्वदलीय बैठक में पीएम की गैरमौजूदगी पर उठे सवाल
पीएम मोदी सर्वदलीय बैठक से दूर रहे और इससे पहले अपने कार्यकाल के दौरान पीएम संसदीय कार्य मंत्री द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठकों में शामिल हुए थे. उनकी अनुपस्थिति पर विपक्ष ने सवाल उठाए थे. इस पर संसदीय कार्यमंत्री प्रशाद जोशी ने कहा, यह बैठक उन्होंने बुलाई है और खुद पीएम ने इस तरह की बैठक में शामिल होने की परंपरा को रखा था.
आप ने बहिष्कार किया
आम आदमी पार्टी ने सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार किया और AAP सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि बैठक में उन्हें बोलने नहीं दिया गया. वह मृतक किसान के परिजनों को एमएसपी और मुआवजे पर गारंटी देने की मांग कर रहे थे. जब उन्हें बोलने नहीं दिया गया तो उन्होंने बैठक का बहिष्कार कर दिया.।






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