लखनऊ। देश को झकझोर देने वाला उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात का बिकरू कांड को शायद ही कोई ऐसा होगा जो भूला होगा।बिकरू कांड को पूरे चार साल हो चुके हैं।मुख्य आरोपी विकास दुबे अब इस दुनिया में नहीं है,लेकिन सरकारी जांच में अभी जिंदा है।साल 2020 को हुए बिकरू कांड के बाद विकास दुबे और उसकी गैंग की 10.76 करोड़ की संपत्ति अटैच की गई थी, जिसकी जांच अब पूरी हो चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले में अब चार्जशीट दाखिल कर ली है।
कानपुर देहात के चौबेपुर के बिकरू गांव में दो जुलाई 2020 को दबिश देने गई पुलिस टीम पर विकास दुबे गैंग और उसके अन्य साथियों ने अंधाधुंध फायरिंग की थी,जिसमें आठ पुलिस कर्मियों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे।पहले तो पुलिस सिर्फ विकास दुबे के आपराधिक मामलों की ही जांच कर रही थी,लेकिन इस बीच वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने विकास दुबे गैंग की काली कमाई से खड़ी की गई अरबों की संपत्तियों की शिकायत शासन और ईडी समेत अन्य जांच एजेंसियों से की थी।
इसके बाद बिकरू कांड की एसआईटी जांच में विकास दुबे समेत गिरोह के अन्य सदस्यों की 150 करोड़ की संपत्तियां सामने आई थी।एसआईटी ने प्रदेश सरकार से संपत्तियों की ईडी जांच की सिफारिश की थी।एसआईटी की संस्तुति पर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच ईडी को ट्रांसफर की थी।
ईडी की शुरुआती जांच में विकास दुबे, उसकी पत्नी ऋचा समेत 5 लोगों की 10.76 करोड़ की संपत्तियां ईडी ने 2022 में अटैच की थी।इस केस की जांच ईडी कर रही थी। पुख्ता साक्ष्य जुटाने और जांच पूरी करने के बाद ईडी ने अब 22 मार्च 2024 को शुरुआती चार्जशीट विकास दुबे और उसकी पत्नी ऋचा समेत 5 लोगों के खिलाफ दाखिल की है।







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